Sunday, 25 October 2026

मुंबई में स्मॉग पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त: पटाखों पर रोक, जानें सेहत बचाने के आसान उपाय

स्मॉग और धुंध में डूबा मुंबई शहर का दृश्य

मुंबई की हवा एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। त्योहारी सीजन के बीच शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार 150 से 200 के बीच दर्ज हो रहा है, जो “अस्वस्थ” श्रेणी में आता है। कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर दिल्ली से भी बदतर बताया जा रहा है। इस गंभीर स्थिति पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है और सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। आइए जानते हैं कोर्ट के निर्देश क्या हैं, स्मॉग सेहत के लिए कितना खतरनाक है और खुद को बचाने के लिए आप क्या आसान उपाय अपना सकते हैं।

हाईकोर्ट के सख्त निर्देश: क्या-क्या कहा गया

21 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने मुंबई में बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि शहर में वायु गुणवत्ता खराब होने के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण और सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने से जुड़े पुराने निर्देशों का भी लगातार उल्लंघन हो रहा है। व्यस्त सड़कों पर पटाखे फोड़े जाने और पूर्व आदेशों का पालन न होने की घटनाएं अदालत के सामने रखी गईं।

कोर्ट ने मुंबई पुलिस आयुक्त को सभी थाना प्रभारियों के साथ बैठक कर निर्देशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) के प्रमुखों को 26 अक्टूबर को अगली सुनवाई में उपस्थित होकर प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया गया है।

  • पटाखों पर पूर्ण रोक: शहर की किसी भी सार्वजनिक सड़क, व्यस्त गली या फुटपाथ पर पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
  • साइलेंस जोन में शून्य सहनशीलता: अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, अदालतों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास घोषित साइलेंस जोन में पटाखे फोड़ने पर शत-प्रतिशत रोक लागू रहेगी।
  • SOP बनाने का आदेश: बीएमसी और पुलिस को उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ त्वरित कार्रवाई, जब्ती और जुर्माने के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करनी होगी।
  • जनजागरूकता अभियान: अदालत ने पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण के दुष्परिणामों के बारे में लोगों को सूचित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अत्यंत स्तब्धकारी है — शहर के पास समुद्री हवा का प्राकृतिक लाभ है, खुला समुद्र और खुले स्थान हैं, फिर भी इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब लाखों नागरिक सांस लेने में तकलीफ झेल रहे हैं, तो प्रवर्तन अधिकारी चैन की नींद कैसे सो सकते हैं। गौरतलब है कि 22 सितंबर के आदेशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई खास सुधार नहीं दिखा, जिससे कोर्ट की नाराजगी और बढ़ गई।

स्मॉग सेहत के लिए कितना खतरनाक है

मुंबई में प्रदूषण के मुख्य कारणों में निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, वाहनों का धुआँ, यातायात का दबाव और त्योहारों के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआँ शामिल हैं। AQI का 150 से 200 के बीच होना यानी हवा “अस्वस्थ” श्रेणी में है — ऐसी हवा में सांस लेना स्वस्थ लोगों के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है, और संवेदनशील लोगों के लिए तो गंभीर खतरा बन सकता है।

प्रदूषण का असर सबसे ज्यादा बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों पर पड़ता है। धुंध भरी हवा में सांस लेने से आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी, सांस फूलना और एलर्जी जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। अस्थमा और हृदय रोग के मरीजों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से जोखिम भरी होती है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, किसी विशेष दिन के प्रदूषण स्तर का सटीक आकलन संबंधित निगरानी केंद्रों के AQI आंकड़ों से ही किया जाना चाहिए।

रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा असर

बढ़ते स्मॉग ने मुंबईकरों की दिनचर्या को भी प्रभावित किया है। सुबह की सैर पर निकलने वाले लोग अब धुंध भरे माहौल में व्यायाम करने से कतराने लगे हैं। बच्चों का बाहर खेलना सीमित हो गया है और बुजुर्गों को नियमित सैर रद्द करनी पड़ रही है। त्योहारी सीजन में बाहर निकलने की खुशी पर भी प्रदूषण का साया है — यही वजह है कि हाईकोर्ट ने निर्देशों के साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया है।

खुद को और परिवार को बचाने के आसान उपाय

प्रदूषण से पूरी तरह बचना संभव नहीं, लेकिन कुछ आसान आदतों से इसके नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है:

  • मास्क पहनें: बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क (N95) जरूर पहनें, खासकर भीड़भाड़ वाली सड़कों और निर्माण क्षेत्रों के पास।
  • AQI देखकर बाहर निकलें: सुबह-सुबह या देर शाम जब धुंध ज्यादा हो, व्यायाम और सैर से बचें। बाहर जाने से पहले अपने इलाके का AQI जरूर जांच लें।
  • घर की हवा साफ रखें: खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें। संभव हो तो एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और घर में हरे पौधे लगाएं।
  • पानी खूब पिएं: दिनभर में पर्याप्त पानी पिएं — गुनगुना पानी गले की खराश में राहत देता है। तुलसी-अदरक वाली हर्बल चाय भी फायदेमंद हो सकती है।
  • धूम्रपान से दूरी: धूम्रपान करने वालों के लिए प्रदूषित हवा दोगुना नुकसानदेह होती है। इस मौसम में इससे पूरी तरह बचें।
  • बच्चों और बुजुर्गों का खास ख्याल: बच्चों को धुंध में बाहर खेलने न भेजें और बुजुर्गों की दवाइयां समय पर दिलवाएं।
  • गाड़ी में सावधानी: कार के शीशे बंद रखें और AC को रीसर्कुलेशन मोड पर चलाएं ताकि बाहर की धुंध अंदर न आए।
  • डॉक्टर से मिलें: लगातार खांसी, सांस फूलना या आंखों में तेज जलन हो तो देर न करें — तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

आगे क्या: 26 अक्टूबर पर सबकी नजर

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि बीएमसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस प्रशासन प्रदूषण रोकने के लिए कौन-से ठोस कदम उठाते हैं। 26 अक्टूबर को अगली सुनवाई में अधिकारियों को अपनी कार्रवाई का ब्योरा देना होगा। शहरवासियों के लिए साफ हवा सुनिश्चित करना केवल त्योहारों तक सीमित अभियान नहीं, बल्कि पूरे वर्ष लागू रहने वाली प्रशासनिक जिम्मेदारी है — और यह जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ हम नागरिकों को भी अपनी सेहत की रक्षा के लिए सजग रहना होगा।

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राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं, देश-राज्य की राजनीति और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबरों पर लेखन। बिजनेस और स्पोर्ट्स की खबरें भी। ब्रेकिंग न्यूज की होड़ के बीच डिजिटल मीडिया में एआई जैसे नवाचार की नर्सरी का छात्र।