Sunday, 25 October 2026

कांगो में इबोला के खिलाफ बड़ी उम्मीद: ‘तुमैनी’ वैक्सीन ट्रायल शुरू, 9,700 से ज्यादा मामले

कांगो के बुनिया में तुमैनी वैक्सीन ट्रायल के दौरान स्वास्थ्यकर्मी टीका लगाते हुए

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में फैले इबोला के अब तक के सबसे भयानक प्रकोप के बीच वैज्ञानिकों को एक बड़ी उम्मीद मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस एडनोम घेबियस ने घोषणा की है कि शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को इस प्रकोप में इबोला वैक्सीन का पहला क्लिनिकल परीक्षण शुरू हो गया है। ‘तुमैनी’ (Tumaini) नाम के इस ट्रायल में स्वाहिली भाषा में ‘तुमैनी’ का अर्थ ‘आशा’ होता है — और यही आशा अब हजारों जानें बचा सकती है।

क्या है तुमैनी ट्रायल?

यह ट्रायल फेज 2/3 का एक एडाप्टिव प्लेटफॉर्म अध्ययन है, जिसे महामारी तैयारी नवाचार गठबंधन (CEPI) फंडिंग और सहयोग दे रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक ही परीक्षण ढांचे में कई वैक्सीन उम्मीदवारों की सुरक्षा, प्रभावकारिता और प्रतिरक्षा-उत्पादकता का परीक्षण किया जा सकेगा। ट्रायल में ‘रिंग टीकाकरण’ दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है — यानी पुष्ट मामलों के संपर्क में आए उन लोगों को टीका लगाया जाएगा जिन पर संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है। इससे प्रकोप के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनाकर संचरण को रोकने की कोशिश होगी।

परीक्षण की शुरुआत डीआरसी के उत्तरपूर्वी इटुरी प्रांत की राजधानी बुनिया में एर्वेबो वैक्सीन के पहले शॉट के साथ हुई। बुनिया इस प्रकोप का केंद्र माना जाता है। टेड्रोस ने सोशल मीडिया पर लिखा, “विज्ञान हमें आशा देता है। आज बुनिया में पहले प्रतिभागियों को तुमैनी ट्रायल में टीका लगाया गया। यह परीक्षण हमें यह समझने में मदद करेगा कि बुंडिबुग्यो वायरस के लिए डिज़ाइन किया गया कोई भी वैक्सीन उम्मीदवार काम करता है या नहीं।”

बुंडीबुग्यो: वह वायरस जिसके खिलाफ कोई टीका नहीं

इस प्रकोप के पीछे इबोला की बुंडीबुग्यो प्रजाति है — एक अपेक्षाकृत दुर्लभ वायरस जिसके खिलाफ अब तक कोई अनुमोदित टीका या उपचार मौजूद नहीं है। सबसे पहले इसमें इस्तेमाल किया जा रहा एर्वेबो टीका इबोला के ज्यादा सामान्य ज़ैरे स्ट्रेन के खिलाफ अनुमोदित है, लेकिन बुंडीबुग्यो के खिलाफ इसकी क्रॉस-सुरक्षा कभी सिद्ध नहीं हुई। यही सवाल इस ट्रायल का केंद्र है।

ट्रायल में जल्द ही दो बुंडीबुग्यो-विशिष्ट उम्मीदवार टीके भी शामिल होने की तैयारी में हैं, जो अभी छोटे पैमाने के शुरुआती चरण के नैदानिक परीक्षणों से गुजर रहे हैं। इनमें से एक को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ChAdOx1 एडेनोवायरल वेक्टर तकनीक से विकसित कर रहा है, जबकि दूसरा अमेरिका की मॉडर्ना कंपनी एमआरएनए तकनीक से बना रही है। इन दोनों को CEPI से फंडिंग मिली है। WHO के आपात्कालीन निदेशक चिकवे इहेकेवेज़ू ने कहा कि यह ट्रायल यह तय करने के लिए कठोर साक्ष्य तैयार करेगा कि भाग लेने वाले टीके जोखिम में घिरी आबादी की रक्षा कर सकते हैं या नहीं।

प्रकोप की भयावह तस्वीर

डीआरसी ने 15 मई को इबोला के अपने 17वें प्रकोप की घोषणा की थी, और दो दिन बाद WHO ने इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित कर दिया — जो संगठन का दूसरा सबसे ऊंचा चेतावनी स्तर है। अफ्रीका CDC ने भी इसे महाद्वीपीय सुरक्षा का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया।

डीआरसी के स्वास्थ्य अधिकारियों के 20 अक्टूबर तक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश में 9,704 पुष्ट मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें 4,687 मौतें हुई हैं — मृत्यु दर 48.3 प्रतिशत है। यह कांगो में दर्ज अब तक का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप बन गया है, और वैश्विक स्तर पर 2014-2016 के पश्चिम अफ्रीकी महामारी के बाद दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप है। इबोला शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है और रक्तस्रावी बुखार का कारण बनता है; पिछले 50 वर्षों में इसने अफ्रीका में 15,000 से अधिक लोगों की जान ले ली है।

पड़ोसी देशों पर भी मंडरा रहा खतरा

प्रकोप का असर कांगो की सीमाओं से बाहर भी दिख रहा है। केन्या में एक 65 वर्षीय महिला इबोला से मरने वाली दूसरी मरीज बन गई है, जिससे सीमा पार प्रसार का जोखिम बढ़ गया है। इसके जवाब में केन्या ने डीआर कांगो समेत 10 उच्च जोखिम वाले देशों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग बढ़ा दी है — यात्रियों को उड़ान से पहले डिजिटल निगरानी फॉर्म भरना होगा और आगमन पर क्यूआर कोड दिखाना होगा। केन्या सरकार इबोला के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सार्वजनिक संदेश भी जारी कर रही है।

आगे की राह

WHO के अफ्रीका क्षेत्रीय निदेशक मोहम्मद जानाबी ने ट्रायल की शुरुआत का स्वागत करते हुए कहा कि इससे न केवल मौजूदा प्रकोप की प्रतिक्रिया मजबूत होगी, बल्कि भविष्य की महामारियों के लिए तैयारी भी बेहतर होगी। परीक्षण में गर्भवती महिलाओं और 12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को भी शामिल किया जाएगा — वे आबादी जिनके लिए अक्सर नैदानिक परीक्षणों में साक्ष्य नहीं जुटाए जाते। DRC की इबोला प्रतिक्रिया के घटना प्रबंधक स्टीव अहुका-मुंडेके ने इसे प्रभावित समुदायों की तत्काल जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

अगर तुमैनी ट्रायल सफल रहा, तो यह पहली बार होगा जब बुंडीबुग्यो वायरस के खिलाफ टीके की प्रभावकारिता के स्पष्ट साक्ष्य मिलेंगे — एक ऐसी बड़ी प्रगति जो इस प्रकोप पर प्रतिक्रिया को पूरी तरह बदल सकती है और भविष्य के प्रकोपों के लिए जीवन बचाने वाली तैयारी दे सकती है।

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राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं, देश-राज्य की राजनीति और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबरों पर लेखन। बिजनेस और स्पोर्ट्स की खबरें भी। ब्रेकिंग न्यूज की होड़ के बीच डिजिटल मीडिया में एआई जैसे नवाचार की नर्सरी का छात्र।