फ्रांस इस समय गंभीर सामाजिक अशांति से गुजर रहा है। बढ़ती महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और ईंधन-ऊर्जा की कीमतों में उछाल के खिलाफ देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने कई शहरों में हिंसक रूप ले लिया है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई इलाकों में कर्फ्यू लगाना पड़ा है और 24 अक्टूबर को होने वाले नए प्रदर्शनों से पहले प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात करने का आदेश दिया है। इस बीच पेरिस स्थित भारतीय दूतावास ने फ्रांस में रह रहे और वहां यात्रा कर रहे भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है।
भारतीय दूतावास ने क्या सलाह दी?
भारतीय दूतावास ने 21 अक्टूबर (बुधवार) को जारी अपनी एडवाइजरी में कहा है कि फ्रांस में हाल के घटनाक्रम और कुछ इलाकों में लगाए गए कर्फ्यू को देखते हुए भारतीय नागरिक सतर्क रहें और पूरी सावधानी बरतें। दूतावास ने भारतीयों से अपील की है कि वे उन जगहों पर जाने से बचें जहां प्रदर्शन हो रहे हैं या जहां बड़ी संख्या में लोग जमा हैं। साथ ही फ्रांस के स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों, यातायात संबंधी सूचनाओं और कर्फ्यू के आदेशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी गई है।
एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान स्थिति अचानक बिगड़ सकती है, इसलिए विरोध-प्रदर्शन देखने के लिए घटनास्थल पर न जाएं, भीड़ के बीच न रुकें और हिंसक झड़प वाले इलाकों से गुजरने से बचें। यात्रा करने से पहले सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में रुकावट, सड़क मार्गों और संबंधित क्षेत्र में लागू प्रतिबंधों की जानकारी लेना भी जरूरी बताया गया है। आपात स्थिति में मदद के लिए दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।
आपात स्थिति में कहां करें संपर्क
- भारतीय दूतावास, पेरिस — फोन: +33 6 48 34 00 63, ईमेल: cons.paris@mea.gov.in
- भारत का महावाणिज्य दूतावास, मार्सेई — फोन: +33 7 43 16 25 59, ईमेल: cgo.marseille@mea.gov.in
दूतावास ने कहा है कि नागरिक स्थानीय समाचार माध्यमों और आधिकारिक सरकारी सूचनाओं के जरिए स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखें।
कैसे शुरू हुआ यह आंदोलन?
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों की जड़ें गहरी हैं। सबसे पहले पिछले महीने छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ था। सैकड़ों स्कूलों के छात्र जर्जर इमारतों की मरम्मत, शिक्षकों की कमी दूर करने, कक्षाओं में छात्रों की संख्या कम करने और पढ़ाई का दबाव घटाने की मांग लेकर सड़कों पर उतरे थे। इस दौरान कई जगहों पर हिंसा भी हुई — प्रदर्शनकारियों ने कम से कम 24 स्कूलों में आगजनी या तोड़फोड़ की और इस चरण में करीब 8,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
छात्र आंदोलन में बाद में मजदूर संगठनों और दूसरे तबकों के लोग भी शामिल हो गए। इसके बाद महंगाई, ईंधन और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जिनका आह्वान ‘येलो वेस्ट्स’ आंदोलन ने किया। 17 अक्टूबर को महंगाई और सरकारी सुविधाओं में कमी के खिलाफ 8 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे, जिसके बाद कई शहरों में हालात बेकाबू हो गए।
हिंसा और कर्फ्यू का मंजर
17 अक्टूबर के प्रदर्शनों के दौरान कुछ शहरों में हालात पूरी तरह प्रशासन के नियंत्रण से बाहर हो गए थे — यह बात खुद फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने स्वीकार की है। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों के बाद लिमोज शहर के ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगा दी गई, कई दुकानों में लूटपाट हुई और कारोबार से जुड़ी इमारतों को नुकसान पहुंचाया गया। पेरिस में 21 अक्टूबर को एक क्षतिग्रस्त बैंक की तस्वीर सामने आई, जिसकी दीवार पर ‘पूंजीवाद जान लेता है’ लिखा हुआ था।
हिंसा के बाद पेरिस के प्लास द ला रिपब्लिक इलाके और लेस आल शॉपिंग जिले में रात के समय कर्फ्यू लगाया गया, जबकि लियोन समेत दूसरे शहरों में भी ऐसी पाबंदियां लागू की गईं। न्याय मंत्री जेराल्ड डारमैनिन के मुताबिक 19 अक्टूबर की शाम तक 2,500 से ज्यादा लोगों को पुलिस हिरासत में लिया जा चुका था। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 18 अक्टूबर को कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों की चिंताओं को सुनेगी, लेकिन जिन लोगों ने तोड़फोड़ और लूटपाट की है, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी और उनके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
24 अक्टूबर को नया प्रदर्शन, भारी सुरक्षा
सबसे अहम बात यह है कि आज, 24 अक्टूबर को फ्रांस में नए बड़े प्रदर्शनों की आशंका है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने स्थानीय प्रशासन से प्रभावित इलाकों में आंशिक कर्फ्यू लगाने और बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात करने को कहा है। सरकार का उद्देश्य हिंसा पर नियंत्रण करना और आगामी प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
फ्रांस की यह अशांति सिर्फ एक देश का मसला नहीं है — यूरोप की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था में लगातार बिगड़ते हालात का असर पूरे यूरोपीय संघ और वैश्विक बाजारों पर भी पड़ रहा है। भारतीय नागरिकों और यात्रियों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी सलाह यही है कि वे दूतावास की एडवाइजरी का पालन करें, भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
