Sunday, 25 October 2026

एशियन पैरा गेम्स 2026: भारत ने रचा इतिहास, 114 पदकों के साथ रिकॉर्ड प्रदर्शन

जापान के नागोया में एशियन पैरा गेम्स 2026 के दौरान भाला फेंकते पैरा एथलीट सुमित अंतिल

जापान के आइची-नागोया में हुए एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने इतिहास रच दिया है। पांचवें संस्करण के इन खेलों में भारत ने कुल 114 पदक जीते, जिनमें 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल हैं। यह एशियन पैरा गेम्स के इतिहास में भारत का अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन है और गोल्ड मेडल की संख्या के लिहाज से भी यह सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड है। पदक तालिका में भारत चौथे स्थान पर रहा।

पहले से आधा दल, फिर भी नया कीर्तिमान

इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि भारत ने यह रिकॉर्ड लगभग आधे खिलाड़ियों के दल के साथ बनाया। हांगझोउ 2023 में भारत ने 303 खिलाड़ियों का दल भेजा था, जबकि नागोया में सिर्फ 168 खिलाड़ी गए थे। फिर भी प्रदर्शन दमदार रहा और देश का नाम रोशन करने में खिलाड़ियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। 18 से 23 अक्टूबर 2026 तक चले इन खेलों के आखिरी दिन यानी शुक्रवार को भारत ने एक ही दिन में 9 स्वर्ण पदक अपने नाम किए और इस तरह अभियान का अंत बेहद मजबूत रहा।

पिछले संस्करण में भारत ने 111 पदक जीते थे, जिनमें 29 गोल्ड शामिल थे। उस वक्त भारत पदक तालिका में पांचवें स्थान पर रहा था। इस बार भारत ने हांगझोउ के आंकड़े को पीछे छोड़ते हुए चौथे स्थान पर छलांग लगाई है। खेल विशेषज्ञों के मुताबिक आधे दल के साथ बेहतर पदक तालिका यह दिखाती है कि भारतीय पैरा खेलों में प्रशिक्षण, सुविधाओं और संस्थागत समर्थन का असर अब मैदान पर साफ दिख रहा है।

एथलेटिक्स रहा सबसे बड़ा हथियार

जापान की धरती पर भारतीय पैरा खिलाड़ियों के ऐतिहासिक प्रदर्शन में एथलेटिक्स की भूमिका सबसे अहम रही। ट्रैक और फील्ड की विभिन्न स्पर्धाओं से भारत की झोली में कुल 65 पदक आए, जो पिछले एशियन पैरा गेम्स के मुकाबले 12 ज्यादा हैं। कई स्पर्धाओं में भारतीय एथलीटों ने नए गेम्स रिकॉर्ड भी बनाए।

शुक्रवार को जैवलिन थ्रो में दो बार के पैरालंपिक चैंपियन सुमित अंतिल ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। महेंद्र गुर्जर ने रजत और संदीप सरगर ने कांस्य पदक अपने नाम किया। इस तरह जैवलिन थ्रो के पूरे पोडियम पर भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा रहा। पैरा एथलेटिक्स की ही महिला 400 मीटर टी20 स्पर्धा में दीप्ति जीवनजी ने गेम्स रिकॉर्ड 56.36 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता था।

बैडमिंटन, शूटिंग और आर्चरी में भी जलवा

बैडमिंटन में भारत ने 2 स्वर्ण और 2 रजत पदक जीते। पुरुष एकल एसएल3 के फाइनल में नितेश कुमार ने अपने ही देश के विश्व चैंपियन प्रमोद भगत को 21-18, 21-16 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। एक ही फाइनल में दो भारतीयों का होना अपने आप में गर्व की बात थी। नवीन शिवकुमार ने एसएल4 स्पर्धा में इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को हराकर स्वर्ण अपने नाम किया, जबकि निथ्या स्रे सुमति सिवन ने महिला एकल एसएच6 में रजत पदक हासिल किया।

शूटिंग में मोना अग्रवाल ने 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन एसएच1 स्पर्धा में 357.5 का विश्व रिकॉर्ड स्कोर बनाकर स्वर्ण पदक जीता। यह एशियन पैरा गेम्स 2026 में उनका दूसरा स्वर्ण पदक रहा। भारतीय पैरा बैडमिंटन जोड़ी थुलसिमथी मुरुगेसन और मानसी जोशी ने महिला डबल्स में शानदार खेल दिखाते हुए स्वर्ण पदक जीता, वहीं थुलसिमथी ने नितेश के साथ मिलकर मिक्स्ड डबल्स में रजत भी अपने नाम किया।

तीरंदाजी में शीतल देवी ने स्वर्णिम प्रदर्शन दोहराया। खेलों के दौरान कई विश्व रिकॉर्ड भी टूटे — संदीप ने पुरुष 400 मीटर टी64 में, हनी ने जैवलिन एफ37/38 में और मोना अग्रवाल ने शूटिंग में विश्व रिकॉर्ड बनाए। उद्घाटन समारोह में प्रमोद भगत और सिमरन शर्मा ने भारत के ध्वजवाहक की भूमिका निभाई थी।

16 साल का सफर: 14 से 114 तक

भारत का यह रिकॉर्ड एक रात में नहीं बना। एशियन पैरा गेम्स के पांच संस्करणों में भारत ने हर बार पिछला रिकॉर्ड तोड़ा है:

  • 2010, गुआंगझाओ: 14 पदक (1 स्वर्ण) — 15वां स्थान
  • 2014, इंचियोन: 33 पदक (3 स्वर्ण)
  • 2018, जकार्ता: 72 पदक (15 स्वर्ण) — 9वां स्थान
  • 2023, हांगझोउ: 111 पदक (29 स्वर्ण) — 5वां स्थान
  • 2026, नागोया: 114 पदक (30 स्वर्ण) — 4था स्थान

14 से 114 तक का यह सफर पैरालंपिक खेलों की बड़ी सफलता से भी जुड़ा है। रियो 2016 में भारत को 4 पैरालंपिक पदक मिले थे, टोक्यो 2020 में यह संख्या 19 हुई और पेरिस 2024 में 29, जिनमें 7 स्वर्ण थे। बड़े मंच पर जीतने वाले खिलाड़ी अब नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

आगे का रास्ता: नायक दिखने भी चाहिए

रिकॉर्ड पदक तालिका के बावजूद एक चिंता भी सामने आई है। खेल विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि शीतल देवी जैसी खिलाड़ियों का स्वर्णिम प्रदर्शन लाइव प्रसारण में नहीं दिखाया गया, जो पैरा खेलों की पहुंच के लिए बड़ा सवाल है। मांग उठी है कि इन खिलाड़ियों की कहानियां सामने लाई जाएं, उनके मुकाबले टीवी और डिजिटल मंचों पर लाइव दिखाए जाएं और उन्हें वह पहचान मिले जिसके वे हकदार हैं। तभी नागोया का यह कीर्तिमान भविष्य की बड़ी छलांग की नींव बन पाएगा।

तीस स्वर्ण समेत 114 पदक सिर्फ एक आंकड़ा नहीं हैं। यह सोलह साल की मेहनत, हौसले और बदलती सोच का नतीजा है। 14 पदक से शुरू हुआ सफर आज 114 तक पहुंचा है और अगला लक्ष्य निश्चित तौर पर और ऊंचा होगा।

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राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं, देश-राज्य की राजनीति और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबरों पर लेखन। बिजनेस और स्पोर्ट्स की खबरें भी। ब्रेकिंग न्यूज की होड़ के बीच डिजिटल मीडिया में एआई जैसे नवाचार की नर्सरी का छात्र।