## पहले चरण में पिछड़े, दूसरे चरण में पलटा खेल, 80 वर्ष की उम्र में रचा इतिहास
ब्राजील की राजनीति में रविवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। देश के मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे चरण में जीत दर्ज कर ली है और अब वे चौथी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बनेंगे। ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट की ओर से जारी परिणामों के अनुसार, 99.89 प्रतिशत वोटों की गिनती के बाद लूला को 51.78 प्रतिशत वैध मत मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.23 प्रतिशत वोट मिले।
यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि पहले चरण में लूला पिछड़ गए थे। लूला सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी के उम्मीदवार हैं, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो लिबरल पार्टी के उम्मीदवार और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। 80 वर्ष की उम्र में चौथी बार राष्ट्रपति बनना ब्राजील के लोकतांत्रिक इतिहास में एक असाधारण उपलब्धि मानी जा रही है। परिणाम आते ही साओ पाउलो के पाउलिस्टा एवेन्यू पर सैकड़ों समर्थक जुट गए और उन्होंने लाल झंडे लहराकर जीत का जश्न मनाया।
## पहले चरण में बोल्सोनारो आगे थे, तीन सप्ताह में बदला माहौल
इस चुनाव की कहानी पहले चरण से ही रोमांचक थी। चार अक्टूबर को हुए पहले चरण के मतदान में फ्लावियो बोल्सोनारो को 47.03 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि लूला को 45.16 प्रतिशत वोट मिले थे। इस अंतर ने चुनाव को दूसरे चरण तक पहुंचा दिया और अगले तीन सप्ताह तक लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े देश में जोरदार प्रचार चला।
दूसरे चरण में लूला की टीम ने मजदूरों, गरीब वर्गों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपना अभियान केंद्रित किया। उन्होंने अपने पहले के कार्यकालों की सामाजिक योजनाओं की याद दिलाई और रोजगार तथा कामकाजी लोगों के अधिकारों को मुख्य मुद्दा बनाया। दूसरी ओर, बोल्सोनारो खेमे ने कानून-व्यवस्था और रूढ़िवादी मूल्यों पर जोर दिया। अंत में मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग लूला के अनुभव और सामाजिक न्याय के वादों की ओर झुका, जिससे पहले चरण का अंतर पलट गया।
चुनाव विश्लेषकों का कहना है कि ब्राजील में 1989 में लोकतांत्रिक चुनावों की बहाली के बाद से अब तक आमतौर पर पहले चरण में आगे रहने वाला उम्मीदवार ही दूसरे चरण में जीतता रहा था। इस बार लूला की जीत ने यह क्रम तोड़ दिया है। यही कारण है कि इस परिणाम को केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि ब्राजील की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
## 6×1 कार्यदिवस का मुद्दा और लूला का भावुक संदेश
चुनाव प्रचार के दौरान 6×1 कार्यदिवस का मुद्दा काफी चर्चा में रहा। इसका अर्थ है सप्ताह में छह दिन काम और एक दिन छुट्टी की व्यवस्था। लूला ने इस व्यवस्था को खत्म करने की दिशा में काम करने का वादा किया था और समर्थकों ने इसे मजदूरों के जीवन में बड़ा बदलाव बताकर प्रचारित किया। परिणाम के बाद अपने संदेश में लूला ने कहा कि एक बार फिर ब्राजील की जनता ने दिखा दिया है कि जब लोग साथ चलते हैं तो कोई सपना बड़ा नहीं होता।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि प्रचार के थकाऊ दिन केवल चुनावी क्षण नहीं थे, बल्कि सपनों से भरी मुलाकातें थीं, जो 6×1 कार्यदिवस की समाप्ति जैसी ठोस उपलब्धियों में बदलीं। उन्होंने कहा कि हर बढ़ा हुआ हाथ और हर मुस्कान उन्हें यह याद दिलाती है कि उन्होंने अपना जीवन देश के मजदूरों की लड़ाई को क्यों समर्पित किया। उन्होंने समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि यह यात्रा उन्हें और मजबूत, एकजुट और बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित करके गई है और उनकी कहानी में अभी कई सुंदर पन्ने लिखे जाने बाकी हैं।
## पांच जनवरी 2027 को शपथ, 2027 से 2030 तक चलेगा कार्यकाल
लूला पांच जनवरी 2027 को चौथे कार्यकाल के लिए शपथ लेंगे। उनका नया कार्यकाल 2027 से 2030 तक चलेगा। लूला इससे पहले भी तीन बार राष्ट्रपति रह चुके हैं और ब्राजील के सबसे प्रभावशाली वामपंथी नेताओं में गिने जाते हैं। उनकी पहचान गरीबी कम करने वाली सामाजिक योजनाओं, मजदूर आंदोलन से जुड़े नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय मंच पर विकासशील देशों की आवाज उठाने वाले नेता के रूप में रही है।
हालांकि नया कार्यकाल आसान नहीं होगा। ब्राजील की संसद में बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी का दबदबा है और उसने दशकों में सबसे बड़ा संसदीय दल बनाया हुआ है। ऐसे में लूला को अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए संसद में समझौते और गठबंधन की राजनीति करनी होगी। इसके अलावा देश के सामने सार्वजनिक कर्ज को स्थिर करने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। महंगाई, रोजगार और सामाजिक खर्च के बीच संतुलन साधना नई सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
## अमेरिका और लैटिन अमेरिका की राजनीति पर पड़ेगा असर
इस चुनाव का असर केवल ब्राजील तक सीमित नहीं रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी राजनीति के विस्तार के समर्थक माने जाते हैं और उन्होंने पहले चरण में बोल्सोनारो की बढ़त को बड़ी जीत बताया था। अब लूला की जीत से उस प्रयास को झटका लगा है। विश्लेषकों का मानना है कि लूला की जीत से लैटिन अमेरिका में वामपंथी और मध्य-वामपंथी राजनीति को फिर से मजबूती मिलेगी।
ब्राजील बड़ी अर्थव्यवस्था है और अमेजन वर्षावनों के कारण पर्यावरण की वैश्विक राजनीति में उसकी केंद्रीय भूमिका है। भारत समेत विकासशील देशों के लिए भी ब्राजील एक महत्वपूर्ण साझेदार है।
## ब्राजील के मतदाताओं ने लोकतंत्र को चुना
समर्थकों ने इस जीत को लोकतंत्र की जीत बताया है। उनका कहना है कि पहले चरण में पिछड़ने के बाद भी जनता ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना फैसला बदलकर दिखाया कि ब्राजील का लोकतंत्र जीवंत है। चुनाव आयोग की ओर से परिणामों की पारदर्शी घोषणा और शांतिपूर्ण मतदान प्रक्रिया ने भी इस भरोसे को मजबूत किया है।
आने वाले महीनों में लूला की प्राथमिकताएं स्पष्ट होंगी, लेकिन यह तय है कि उनका चौथा कार्यकाल ब्राजील के इतिहास में दर्ज हो गया है। एक ऐसे नेता की वापसी, जो 80 वर्ष की उम्र में भी चुनावी मैदान में उतरा और पहले चरण की हार जैसी स्थिति से जीत तक पहुंचा, आने वाली पीढ़ियों के लिए राजनीति में धैर्य, संगठन और जनता से जुड़ाव का उदाहरण बन गई है।
