Tuesday, 27 October 2026

दिल्ली के 1086 सरकारी स्कूलों में बनेंगे मेडिकल रूम, हर स्कूल में होंगे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी

स्कूल के मेडिकल रूम में बच्चे की जांच करती प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी

## स्कूल में तबीयत बिगड़े तो अब इंतजार नहीं, परिसर में ही मिलेगा प्राथमिक उपचार

दिल्ली सरकार ने राजधानी के सभी 1086 सरकारी स्कूलों में मेडिकल रूम बनाने की योजना को आगे बढ़ा दिया है। इस योजना के तहत हर स्कूल में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी तैनात होंगे, ताकि स्कूल समय के दौरान किसी बच्चे की तबीयत अचानक खराब होने या चोट लगने पर उसे तुरंत प्राथमिक उपचार मिल सके। इस पहल पर हर वर्ष लगभग 48.87 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हर बच्चे को सुरक्षित, संवेदनशील और देखभालपूर्ण वातावरण देना है।

स्कूलों में बच्चों की सेहत का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। कई बार खेल के दौरान चोट लग जाती है, कभी तेज बुखार आ जाता है और कभी किसी बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होती है। ऐसे में अभिभावक और शिक्षक अक्सर इस चिंता में रहते हैं कि मदद कितनी जल्दी मिलेगी। मेडिकल रूम की व्यवस्था इसी चिंता का जवाब है। अब बच्चे को अस्पताल पहुंचाने से पहले स्कूल परिसर में ही शुरुआती देखभाल मिल सकेगी और जरूरत पड़ने पर उसे सही समय पर आगे के इलाज के लिए भेजा जा सकेगा।

## क्या-क्या सुविधा मिलेगी, इसे विस्तार से समझिए

मेडिकल रूम केवल एक कमरा नहीं होगा, बल्कि एक छोटी स्वास्थ्य इकाई की तरह काम करेगा। यहां प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी बच्चों की शुरुआती जांच कर सकेंगे, चोट पर पट्टी कर सकेंगे, बुखार या अन्य सामान्य तकलीफ में प्राथमिक उपचार दे सकेंगे और गंभीर स्थिति में अभिभावकों तथा नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर सकेंगे। इससे छोटी समस्याओं के लिए बच्चों को स्कूल से बाहर नहीं जाना पड़ेगा और पढ़ाई भी कम प्रभावित होगी।

इस योजना में छात्राओं के लिए विशेष व्यवस्था भी रखी गई है। मेडिकल रूम में मासिक धर्म के दौरान जरूरी देखभाल के लिए सुरक्षित, निजी और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराया जाएगा। इससे छात्राओं को स्कूल समय में असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे बिना झिझक अपनी जरूरत बता सकेंगी। किशोरावस्था में सेहत से जुड़ी झिझक को दूर करना भी इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

इसके अलावा स्वास्थ्यकर्मी हाथ धोने, संतुलित आहार और मच्छरों से बचाव जैसी स्वस्थ आदतों पर भी बच्चों की सहायता करेंगे। इस तरह मेडिकल रूम स्वस्थ आदतें विकसित करने का केंद्र भी बन सकता है।

## चरणबद्ध तरीके से लागू होगी योजना

दिल्ली सरकार ने इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला किया है। पहले चरण में उन स्कूलों में मेडिकल रूम स्थापित किए जाएंगे, जहां पहले से अलग कमरे उपलब्ध हैं। इससे योजना जल्दी शुरू हो सकेगी और अधिक से अधिक बच्चों को जल्द लाभ मिलेगा। इसके बाद जिन स्कूलों में अतिरिक्त कमरों की व्यवस्था नहीं है, वहां वैकल्पिक कमरों और पोर्टा केबिन के माध्यम से मेडिकल सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा है कि सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित और देखभालपूर्ण वातावरण मिले। उन्होंने कहा कि जब किसी विद्यार्थी की तबीयत स्कूल के दौरान अचानक खराब होती है या उसे चोट लगती है, तो अभिभावकों और शिक्षकों को यह भरोसा होना चाहिए कि स्कूल परिसर में ही तत्काल प्राथमिक उपचार और आवश्यक देखभाल उपलब्ध है। उनका यह भी कहना है कि यह पहल विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और समग्र कल्याण को प्राथमिकता देने के साथ-साथ सरकारी स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

## अभिभावकों और शिक्षकों को क्या भरोसा मिलेगा

किसी भी अभिभावक के लिए सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि उसका बच्चा स्कूल में सुरक्षित है या नहीं। मेडिकल रूम की व्यवस्था इस भरोसे को मजबूत करेगी। अभिभावकों को यह पता होगा कि स्कूल में कोई प्रशिक्षित व्यक्ति मौजूद है जो आपात स्थिति में सही कदम उठा सकता है। शिक्षकों को भी इसका लाभ मिलेगा, क्योंकि अब उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी आपात स्थिति में अकेले निर्णय नहीं लेना पड़ेगा। वे पढ़ाई पर ध्यान दे सकेंगे और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी प्रशिक्षित कर्मी संभालेंगे।

विशेष रूप से छोटे बच्चों के लिए यह व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण है। छोटे बच्चे अपनी तकलीफ ठीक से बता नहीं पाते और कई बार दर्द छिपा लेते हैं। प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी बच्चों के लक्षणों को पहचानकर समय पर मदद कर सकते हैं। इससे छोटी बीमारी के गंभीर होने का खतरा कम होगा और अभिभावकों को समय पर जानकारी मिल सकेगी।

## चुनौतियां भी हैं, जिन पर ध्यान देना होगा

इतनी बड़ी योजना को सफल बनाने के लिए कुछ चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा। पहली चुनौती प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित उपलब्धता है। हर स्कूल में कर्मी तैनात करना आसान नहीं है और उनकी छुट्टी या तबादले के समय वैकल्पिक व्यवस्था भी जरूरी होगी। दूसरी चुनौती मेडिकल रूम में जरूरी सामान, दवाएं और उपकरणों की नियमित आपूर्ति बनाए रखना है।

तीसरी चुनौती निगरानी की है। यह सुनिश्चित करना होगा कि मेडिकल रूम केवल कागजों पर न रहें, बल्कि वास्तव में काम करें। इसके लिए नियमित निरीक्षण, अभिभावकों से फीडबैक और स्वास्थ्य विभाग के साथ तालमेल जरूरी होगा। अगर इन बातों पर ध्यान दिया गया तो यह योजना दिल्ली के सरकारी स्कूलों के लिए एक मिसाल बन सकती है और दूसरे राज्य भी इससे सीख ले सकते हैं।

## सेहतमंद बच्चा ही बेहतर पढ़ाई कर सकता है

बच्चों की पढ़ाई और सेहत एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हैं। जो बच्चा बार-बार बीमार पड़ता है, वह कक्षा में पीछे रह जाता है। जो बच्चा स्कूल में असुरक्षित महसूस करता है, वह मन लगाकर नहीं पढ़ पाता। इसलिए स्कूलों में स्वास्थ्य सुविधाएं देना केवल एक चिकित्सा व्यवस्था नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का भी एक तरीका है।

दिल्ली के 1086 स्कूलों में मेडिकल रूम की योजना इसी सोच को आगे बढ़ाती है। अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है तो लाखों बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा। अभिभावकों का भरोसा बढ़ेगा, शिक्षकों का बोझ कम होगा और बच्चों को यह संदेश मिलेगा कि उनकी सेहत की परवाह की जाती है। यही वह भरोसा है जो सरकारी स्कूलों को और मजबूत बना सकता है।

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राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं, देश-राज्य की राजनीति और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबरों पर लेखन। बिजनेस और स्पोर्ट्स की खबरें भी। ब्रेकिंग न्यूज की होड़ के बीच डिजिटल मीडिया में एआई जैसे नवाचार की नर्सरी का छात्र।