भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भारतीय इक्विटी इंडेक्स लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 460.30 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,249.39 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 इंडेक्स 123.70 अंक यानी 0.54 प्रतिशत लुढ़ककर 22,687.65 पर आ गया, जो 22,700 के अहम स्तर से नीचे है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
बाजार में कितनी गिरावट, कौन से शेयर टूटे
22 अक्टूबर को कारोबार के दौरान बाजार पर शुरू से ही दबाव था। इस दौरान 1,323 शेयरों में तेजी आई, जबकि 2,670 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई और 155 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। यानी गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वालों से दोगुनी से भी ज्यादा रही।
निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में नेस्ले इंडिया, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, एचडीएफसी लाइफ, कोल इंडिया और एचडीएफसी बैंक शामिल रहे। नेस्ले इंडिया के शेयरों में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, क्योंकि खाद्य सुरक्षा नियामक एफएसएसएआई ने कथित भ्रामक उत्पाद दावों को लेकर कंपनी को नोटिस जारी किए हैं। वहीं, तेजी दिखाने वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस, सिप्ला, भारती एयरटेल, बजाज ऑटो और आईसीआईसीआई बैंक शामिल थे।
सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में
गुरुवार को बाजार की गिरावट किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं रही। सभी सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। ऑटो, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, एनर्जी और एफएमसीजी इंडेक्स में 1-1 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि मीडिया इंडेक्स 2 प्रतिशत नीचे आ गया।
ऑटो सेक्टर पर कमजोर मानसून और ग्रामीण मांग की चिंता का असर दिख रहा है। हालांकि, फेस्टिव सीजन में दोपहिया वाहनों की खरीदारी बढ़ने से कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है। हीरो मोटोकॉर्प, बजाज ऑटो और टीवीएस मोटर जैसे शेयरों पर निवेशकों की नजर रहेगी।
कच्चा तेल 112 डॉलर के पार: बढ़ी महंगाई की चिंता
गिरावट का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव रहा। सऊदी अरब के शायबा तेल क्षेत्र और दम्माम हवाई अड्डे पर हुए हमलों के बाद कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है और दिन के दौरान 113 डॉलर के करीब भी कारोबार करता दिखा।
इस स्थिति ने महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं और भारत की तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर भी आशंकाएं पैदा कर दी हैं। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन का अनुमान है कि 2026 की चौथी तिमाही में ब्रेंट का औसत भाव 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रह सकता है, यानी महंगे तेल का दौर अभी थमने वाला नहीं दिख रहा।
रुपया भी कमजोर, विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
गुरुवार को भारतीय रुपया 36 पैसे गिरकर 94.82 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि पिछली बार यह 94.46 पर बंद हुआ था। रुपए की यह आठ दिन की मजबूती के बाद पहली बड़ी गिरावट है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की गिरावट को तेज किया है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मार्जिन पर लिए गए दांव में भी कमी आ रही है। लीवरेज्ड पोजीशन सितंबर के रिकॉर्ड स्तर से घटकर 1.56 लाख करोड़ रुपये पर आ गई हैं, क्योंकि स्मॉल और मिडकैप शेयरों में बिकवाली जारी है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मार्जिन का दबाव
बाजार पर घरेलू कारणों से ज्यादा बाहरी दबाव हावी रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली ने गिरावट को तेज किया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका और डॉलर की मजबूती निवेशकों को सुरक्षित डॉलर संपत्तियों की ओर धकेल रही है।
इसके साथ ही मार्जिन पर लिए गए दांव में भी कमी आ रही है। लीवरेज्ड पोजीशन सितंबर के रिकॉर्ड स्तर से घटकर करीब 1.56 लाख करोड़ रुपये पर आ गई हैं, क्योंकि स्मॉल और मिडकैप शेयरों में बिकवाली जारी है। जानकारों के मुताबिक जब मार्जिन फंडिंग घटती है तो बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ जाता है, क्योंकि निवेशकों को अपनी पोजीशन घटानी पड़ती है।
निवेशकों की नजर किन बातों पर
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी। सबसे बड़ी नजर कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और तेल की कीमतें नीचे आती हैं, तो बाजार को राहत मिल सकती है। दूसरी ओर, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर अंतिम दौर की बातचीत भी निवेशकों के लिए उम्मीद की किरण है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के मुताबिक दोनों देशों ने बचे हुए प्रमुख मुद्दों की पहचान कर ली है और समझौता लगभग तैयार बताया जा रहा है।
घरेलू मोर्चे पर फेस्टिव सीजन की मांग, रुपये की चाल और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार को दिशा देंगे। अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस जैसे कुछ शेयरों में मजबूत नतीजों के दम पर तेजी भी देखी गई है, जो बताता है कि अच्छे बुनियादी वाले शेयरों में अभी भी दम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाहरी कारणों से बाजार पर दबाव बना हुआ है। पश्चिम एशिया के तनाव में कोई कमी न आने तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका और विदेशी निवेशकों की बिकवाली निवेशकों को सुरक्षित डॉलर संपत्तियों की ओर धकेल सकती है।
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे घबराहट में फैसले न लें और लंबी अवधि के नजरिए से मजबूत बुनियादी वाले शेयरों पर ध्यान दें। निफ्टी के लिए अब 22,500 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 23,000 के ऊपर टिकना तेजी की वापसी के लिए जरूरी होगा। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों के रुख पर बाजार की नजर रहेगी।
