राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए गुरुवार का दिन बेहद अहम रहा। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दिल्ली जल बोर्ड की कुल 8,941.22 करोड़ रुपये की 43 बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। द्वारका के श्याम विहार और यूईआर-द्वितीय क्षेत्र में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में इन परियोजनाओं के जरिए यमुना नदी की सफाई और दिल्ली की पेयजल व्यवस्था को नई रफ्तार देने का संकल्प लिया गया। इस मौके पर शाह ने विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा और कहा कि प्रदर्शन और धरने से कुछ हासिल नहीं होता, चुनाव जनता के बीच जाकर जीते जाते हैं।
43 परियोजनाएं: 10 का उद्घाटन, 33 का शिलान्यास
दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा के मुताबिक इस पैकेज में 2,827.11 करोड़ रुपये की लागत वाली 10 परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया, जबकि 6,114.11 करोड़ रुपये की 33 नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई। इन सभी परियोजनाओं का मुख्य लक्ष्य दिल्ली के सीवेज नेटवर्क को मजबूत करना, गंदे पानी के उपचार की क्षमता बढ़ाना और यमुना नदी में गिरने वाले प्रदूषण को कम करना है।
कार्यक्रम में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार के विभिन्न मंत्री, भाजपा के सांसद और विधायक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। गौरतलब है कि गुरुवार को ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 62वां जन्मदिन भी था, और इस खास मौके पर उन्होंने दिल्लीवासियों को विकास की यह बड़ी सौगात दी।
किन-किन परियोजनाओं पर खर्च होगा पैसा
इन 43 परियोजनाओं में शहर की स्वच्छता और जल प्रबंधन से जुड़े कई अहम बुनियादी ढांचे शामिल हैं:
- ओखला में नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट: 1,161 करोड़ रुपये की लागत से 124 एमजीडी क्षमता का नया एसटीपी बनाया जाएगा।
- आठ मौजूदा एसटीपी का उन्नयन: 1,041 करोड़ रुपये खर्च कर आठ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड किया जाएगा, जिससे इनकी संयुक्त क्षमता 78.2 एमजीडी से बढ़कर 140.8 एमजीडी हो जाएगी। इसका लाभ करीब 78.5 लाख लोगों को मिलेगा।
- बाहरी दिल्ली में विकेंद्रीकृत प्लांट: 3,113.67 करोड़ रुपये की लागत से 29 नए विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सीवेज पंपिंग स्टेशन स्थापित होंगे। इनसे 358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गांवों के करीब 36.29 लाख निवासियों को फायदा पहुंचेगा।
- 1,034 किलोमीटर सीवर नेटवर्क: 1,691 करोड़ रुपये की लागत से बिछाए जाने वाले इस नेटवर्क का उद्देश्य गंदे पानी को एकत्र कर उसका उपचार करना है, ताकि वह यमुना में न जाए।
- चंद्रवल में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट: 298.3 करोड़ रुपये से 477 एमएलडी क्षमता का प्लांट लगेगा, जो 1935 और 1955 में बनी पुरानी सुविधाओं की जगह लेगा और 22 लाख लोगों को सेवा देगा।
- मुंडका में ट्रंक ड्रेन: 225.02 करोड़ रुपये की लागत से 4.5 किलोमीटर लंबा ट्रंक ड्रेन बनाया जाएगा।
"यमुना की सफाई हमारी प्राथमिकता"
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि दिल्ली में सरकार बनने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही महीने में यमुना की सफाई को लेकर अधिकारियों के साथ बड़ी बैठक की थी। उन्होंने दावा किया कि इतने कम समय में यमुना सफाई के लक्ष्य की 40 प्रतिशत से अधिक यात्रा पूरी की जा चुकी है।
शाह ने कहा कि ये परियोजनाएं यमुना की सफाई की रीढ़ हैं। सरकार का लक्ष्य दिल्ली के हर घर को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ना और लोगों तक साफ पीने का पानी पहुंचाना है। उन्होंने यमुना में डुबकी लगाने के केजरीवाल के पुराने वादे का जिक्र करते हुए आम आदमी पार्टी पर भी तंज कसा और कहा कि वादे तीन बार किए गए, लेकिन निभाए नहीं गए।
विपक्ष पर तीखा हमला: "कांग्रेस 30 साल तक सत्ता में नहीं आएगी"
कार्यक्रम में शाह ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "प्रदर्शन और धरने से कुछ हासिल नहीं होता। चुनाव जीतना है तो जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं समझनी होंगी और कल्याणकारी योजनाओं पर काम करना होगा।"
गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष राजनीतिक चालबाजी और भीड़ के दम पर जनता के जनादेश को चुनौती नहीं दे सकता। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अपनी नकारात्मक राजनीति के कारण अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आ पाएगी। शाह के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
"चलो यमुना" अभियान: 35 हजार लोगों ने साफ किए 70 घाट
इन परियोजनाओं के शिलान्यास से चार दिन पहले 18 अक्टूबर को दिल्ली सरकार ने "चलो यमुना" अभियान चलाया था, जिसमें करीब 35,000 लोगों ने यमुना के 70 घाटों की सफाई की थी। एक ही सुबह में 76,755 किलोग्राम कचरा हटाया गया। इस अभियान में 20,000 नागरिक और आरडब्ल्यूए सदस्य, 10,500 पार्टी कार्यकर्ता, 2,500 छात्र और 2,000 एनजीओ स्वयंसेवक शामिल हुए। दिल्ली विश्वविद्यालय के 25 से अधिक कॉलेजों के छात्र भी इस मुहिम का हिस्सा बने।
सफाई अभियान में 26 जेसीबी, 19 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 24 नावें, सात वीड हार्वेस्टर और ट्रैश स्किमर के साथ 269 पीडब्ल्यूडी रखरखाव वैन तैनात की गई थीं। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, पीडब्ल्यूडी, एमसीडी, दिल्ली जल बोर्ड, डीडीए, दिल्ली पुलिस और डीडीएमए समेत 10 से अधिक विभागों ने मिलकर काम किया।
आगे की राह: तय समयसीमा में काम पूरा करने की चुनौती
यमुना नदी दिल्ली के लिए लंबे समय से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा रही है। नदी में गिरने वाला अनुपचारित सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और अन्य प्रदूषक पानी की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इसलिए नदी की सफाई के लिए केवल घोषणाओं के बजाय सीवेज ट्रीटमेंट, नालों के प्रबंधन और नियमित निगरानी जैसे ठोस उपायों का असर भी महत्वपूर्ण होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करना और उनके परिणामों की निगरानी करना जरूरी होगा। दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा है कि सीवेज को नदी तक पहुंचने से रोकना ही स्थायी समाधान है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि 8,941 करोड़ की यह बड़ी पहल यमुना को कितना साफ कर पाती है।
