उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चर्चित शिवा शर्मा हत्याकांड में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। 11 दिनों से फरार चल रही मुख्य आरोपी मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रद्धा दुबे को उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार कर लिया है। उसके साथ उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर तनवीर अली उर्फ दानिश को भी पकड़ा गया है। तीनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। मंगलवार (20 अक्टूबर) को हुई इस गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई यूपी एसटीएफ की वाराणसी यूनिट, लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट और नागपुर पुलिस के संयुक्त प्रयास से की गई। नागपुर के वर्धा रोड स्थित चिंचभुवन इलाके में एक किराए के फ्लैट का पता चला था, जहां तीनों आरोपी छिपे हुए थे। पुलिस टीम ने निगरानी और तकनीकी जांच के आधार पर कार्रवाई करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी की पुष्टि अपर पुलिस महानिदेशक अमिताभ यश ने की है, जबकि नागपुर क्राइम ब्रांच के डीसीपी दीपक अग्रवाल ने भी संयुक्त कार्रवाई की पुष्टि की है। पुलिस के अनुसार, तीनों लगातार ठिकाने बदल रहे थे और नागपुर से आगे निकलने की कोशिश में थे, लेकिन उससे पहले ही उन्हें दबोच लिया गया। अब तीनों को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर लखनऊ लाया जा रहा है।
11 दिन की फरारी: बुर्का पहनकर बदले कई ठिकाने
जांच से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, श्रद्धा दुबे गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपनी पहचान और ठिकाने बदल रही थी। लखनऊ से निकलने के बाद वह नेपाल सीमा के आसपास के इलाकों में गई। इसके बाद वह आगरा पहुंची, जहां एक होटल में ठहरी। यात्रा के दौरान पहचान छिपाने के लिए उसने बुर्का भी पहना था।
जानकारी के अनुसार, श्रद्धा ने रविवार को लखनऊ में हाई कोर्ट में गिरफ्तारी पर रोक से जुड़े कागजात पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद वह चालक दानिश के साथ फरार हो गई थी। उसकी बहन रश्मि भी साथ थी। फरारी के दौरान तीनों ने अलग-अलग वाहनों का इस्तेमाल किया। जांच में पुलिस को कानपुर नंबर की एक गाड़ी का सुराग मिला था, जिसमें तीनों के घूमने की बात सामने आई थी।
आखिरकार इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, सीसीटीवी फुटेज, आईपी एड्रेस ट्रैकिंग और स्थानीय स्तर पर मिली सूचनाओं की मदद से पुलिस ने उनका पता लगा लिया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने मोबाइल फोन के इस्तेमाल और यात्रा के तरीकों में भी बदलाव किया था, लेकिन तकनीकी निगरानी के आगे उनकी हर चाल नाकाम रही।
9 अक्टूबर की रात क्या हुआ था?
यह पूरा मामला 9 अक्टूबर की रात का है। लखनऊ में कैफे संचालक शिवा शर्मा की हजरतगंज थाना क्षेत्र स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। घटना के समय शिवा शर्मा और श्रद्धा दुबे के बीच व्यक्तिगत संबंध होने की बात सामने आई थी।
मृतक की मां रंजना शर्मा की लिखित शिकायत के आधार पर 9 अक्टूबर 2026 को हजरतगंज थाने में मुकदमा संख्या 216/2026 दर्ज किया गया था। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला पंजीकृत किया था। तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें, जिनमें एसओजी और सर्विलांस यूनिट शामिल थीं, लगातार छापेमारी कर रही थीं।
मां के आरोप बनाम श्रद्धा का दावा
शिवा की मां रंजना शर्मा ने इस घटना के पीछे गहरी साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि घटना के समय उन्हें श्रद्धा की बहन का फोन आया था, जिसमें कहा गया कि शिवा बालकनी से गिर गया है और उसे लोहिया अस्पताल ले जाया जा रहा है। लेकिन जब वह अस्पताल पहुंचीं, तो वहां कोई नहीं था और न ही शिवा के भर्ती होने का कोई रिकॉर्ड मिला।
रंजना शर्मा के मुताबिक, जब उन्होंने ड्राइवर दानिश से संपर्क किया, तो उसने उन्हें मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में बुलाया। वहां पहुंचने पर दानिश ने कहा कि वह सिर्फ एक नौकर है और उसे कुछ नहीं पता, जिसके बाद वह मौके से फरार हो गया। मां का दावा है कि शिवा डिप्रेशन में नहीं था और वह जल्द से जल्द इंसाफ चाहती हैं।
दूसरी ओर, मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। फरारी के दौरान सामने आए वीडियो और इंटरव्यू में उसने दावा किया कि शिवा ने आत्महत्या की है और बिल्डिंग के सीसीटीवी फुटेज उसकी बेगुनाही साबित कर देंगे। श्रद्धा का कहना है कि वह शिवा को केवल चार महीने से जानती थी। उसने यह भी आरोप लगाया कि शिवा पर लाखों रुपये का कर्ज था और उसने उससे आर्थिक मदद मांगी थी। एक बातचीत में श्रद्धा ने यह भी स्वीकार किया था कि शिवा दो महीने पहले उसके घर पर रहने आया था और इस दौरान उसके घर से आभूषण चोरी होने की बात सामने आई थी।
दोनों पक्षों के विरोधाभासी दावों के कारण शिवा शर्मा की मौत की वास्तविक परिस्थितियां अभी भी जांच का विषय बनी हुई हैं।
पुलिस महकमे में पहले ही हो चुकी थी बड़ी कार्रवाई
गौरतलब है कि श्रद्धा की गिरफ्तारी से एक दिन पहले, सोमवार को पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवालों के बीच महकमे में बड़ी कार्रवाई की गई थी। लखनऊ के डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर को पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया था। एसीपी रजनीश वर्मा को एसीपी अपराध की जिम्मेदारी सौंपी गई, जबकि हजरतगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया गया था। इसके अलावा चार एसीपी के कार्यक्षेत्र में फेरबदल भी हुआ था। शिवा की मौत के दस दिन बाद भी गिरफ्तारी न होने से पुलिस पर सवाल उठ रहे थे, और इन बदलावों को जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा था।
आगे क्या होगा?
नागपुर से गिरफ्तारी के बाद पुलिस तीनों आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाने की तैयारी कर रही है। यहां उनसे घटना की रात की परिस्थितियों, फरारी के दौरान उनकी गतिविधियों, उनकी मदद करने वालों और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर कड़ी पूछताछ की जाएगी।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि शिवा शर्मा की मौत से पहले फ्लैट में क्या हुआ था और उस समय कौन-कौन मौजूद था। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि गिरफ्तारी का अर्थ आरोपों का साबित होना नहीं है। मौत का वास्तविक कारण और आरोपियों की भूमिका पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
