चक्रवात अर्नब का असर अब कमजोर पड़ रहा है, लेकिन उसके बाद की बारिश और बाढ़ से राहत नहीं मिली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, अर्नब का अवशेष 29 अक्टूबर की शाम साढ़े पांच बजे तक मध्य छत्तीसगढ़ और उससे लगे ओडिशा के ऊपर एक सुस्पष्ट कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया। मौसम विभाग ने इसे अर्नब से जुड़ा अंतिम विशेष अपडेट बताया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि खतरा पूरी तरह टल गया है, क्योंकि कम दबाव के क्षेत्र से भी कई इलाकों में बारिश जारी रह सकती है।
ओडिशा में हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। बाढ़ प्रभावित गंजम और आठ अन्य जिलों में बचाव कार्य चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार, कम से कम 59,028 लोगों को उनके घरों में बाढ़ का पानी घुसने के बाद सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इनमें गंजम जिले के 11,882 लोग शामिल हैं। निकाले गए लोगों में 3,001 गर्भवती महिलाएं भी हैं। राज्य सरकार ने बचाव के लिए 300 से अधिक टीमों को तैनात किया है।
बंगाल की खाड़ी में एक नया सिस्टम भी बन रहा है, जिस पर नजर रखी जा रही है।
ओडिशा में बचाव अभियान कैसे चल रहा है
ओडिशा के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा है कि बचाव अभियान में 313 टीमें लगी हुई हैं। इनमें राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की नौ टीमें, ओडिशा आपदा रैपिड एक्शन फोर्स की 60 टीमें और अग्निशमन सेवा विभाग की 244 टीमें शामिल हैं। राज्य में कुल 2,037 चक्रवात आश्रय स्थल तैयार रखे गए हैं, जहां भोजन, पीने के पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं का इंतजाम किया गया है।
तूफान से पहले ही मछली पकड़ने वाली सभी 19,143 नावें किनारे लौट आई थीं और भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों में एहतियाती कदम उठाए गए थे।
हालांकि, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग खबरों में अलग-अलग संख्या सामने आई है। 28 अक्टूबर को एक खबर में 30,000 से अधिक लोगों को हटाने की बात कही गई थी। बाद में एक ओडिया खबर में बुधवार तक करीब एक लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का दावा किया गया। 30 अक्टूबर की ताजा खबर में 59,028 लोगों को बाढ़ के बाद बचाने की बात कही गई है। ये आंकड़े अलग-अलग समय और अलग-अलग तरह की कार्रवाई से जुड़े हो सकते हैं, जैसे एहतियातन स्थानांतरण और बाढ़ के बाद बचाव। इसलिए किसी एक आंकड़े को अंतिम मानने से पहले सरकारी अपडेट का इंतजार करना सही होगा।
आंध्र प्रदेश में लैंडफॉल और नुकसान
चक्रवात अर्नब बुधवार तड़के आंध्र प्रदेश और यनम के तटीय इलाकों से टकराया था। उस समय यह बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान था। लैंडफॉल की प्रक्रिया तड़के दो बजे से सुबह आठ बजे के बीच पूरी हुई। इस दौरान हवा की अधिकतम गति 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई, जबकि हवा के झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचे। इसके बाद तूफान कमजोर होकर गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया और जमीन के अंदर की ओर बढ़ने लगा।
तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए, पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए और कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। पुलिस और सरकारी अधिकारी प्राथमिकता के आधार पर मलबा हटाने का काम कर रहे हैं, ताकि जरूरी सेवाएं बहाल हो सकें और मुख्य रास्तों पर यातायात सुचारू हो सके। आंध्र प्रदेश के दो हवाई अड्डों से 35 से अधिक उड़ानें रद्द की गईं और कुछ उड़ानों को दूसरी जगह भेजा गया।
मौतों के आंकड़े को लेकर खबरों में अंतर है। लैंडफॉल के दिन तीन मौतों की बात कही गई थी, बाद में पांच और एक अन्य खबर में आठ मौतों का उल्लेख हुआ। इसलिए मृतकों की अंतिम संख्या के बारे में अभी स्पष्टता नहीं है।
मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान क्या कहता है
मौसम विभाग के अनुसार, अर्नब का अवशेष अगले 24 घंटों में उत्तर-उत्तरपूर्व दिशा में बढ़ते हुए और कमजोर होकर उत्तर-पूर्व छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में सामान्य कम दबाव के क्षेत्र में बदल जाएगा। इसके बावजूद, 30 अक्टूबर को बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। दिल्ली और आसपास के इलाकों में भी चक्रवाती असर से रात में तेज बारिश की खबर है।
अब ध्यान नए सिस्टम पर है। दक्षिण अंडमान सागर में बना कम दबाव का क्षेत्र 29 अक्टूबर की शाम को उसी क्षेत्र में मौजूद था। अनुमान है कि 31 अक्टूबर के आसपास यह दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के आसपास डिप्रेशन में बदल सकता है। इसके बाद अगले दो दिनों में इसके और मजबूत होकर पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने इस सिस्टम को लेकर 30 अक्टूबर को दोपहर साढ़े बारह बजे अगला विशेष अपडेट जारी करने की जानकारी दी थी।
राहत और आगे की तैयारी
बचाव के साथ-साथ राहत का काम भी चल रहा है। आश्रय स्थलों में रह रहे लोगों को भोजन और पानी देने के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचाया गया है। कुछ महिलाओं ने सुरक्षित तरीके से बच्चों को जन्म भी दिया है, ऐसा एक ओडिया खबर में कहा गया है। बिजली और सड़क सेवाओं को बहाल करने का काम भी प्राथमिकता पर है।
आने वाले दिनों में बाढ़ का पानी उतरने के बाद लोगों को सुरक्षित तरीके से घर लौटाना और नुकसान का आकलन करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
फिलहाल, लोगों को सरकारी सूचनाओं पर भरोसा करने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है। निचले इलाकों और नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम विभाग का अगला अपडेट और राज्य सरकारों की राहत से जुड़ी जानकारी आने वाले दिनों में हालात की साफ तस्वीर देगी।
