## सोमवार को पूरे प्रदेश में ठहरा सरकारी कामकाज, घर-घर गूंजेगी रामायण की चौपाई
महर्षि वाल्मीकि की जयंती के अवसर पर सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। राज्य सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूल, कॉलेज तथा अन्य शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे। सरकारी कार्यालयों में भी सामान्य कामकाज नहीं होगा। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में त्योहारों के बीच मिले इस अवकाश से विद्यार्थियों, अभिभावकों और कर्मचारियों को राहत मिली है, लेकिन जिन लोगों को सरकारी काम निपटाने हैं, उन्हें अपनी योजना एक दिन आगे बढ़ानी होगी।
महर्षि वाल्मीकि को आदि कवि कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने रामायण की रचना की थी। उनकी जयंती केवल एक धार्मिक अवसर नहीं है, बल्कि भारतीय साहित्य, संस्कृति और सामाजिक समरसता के लिए भी एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इसी कारण प्रदेशभर में इस दिन धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यापक तैयारी की गई है।
## क्या बंद रहेगा और क्या खुला रहेगा, इसे साफ समझिए
अवकाश की सबसे बड़ी उलझन आमतौर पर यही होती है कि क्या बंद होगा और क्या नहीं। इस बार स्थिति काफी स्पष्ट है। प्रदेश के सभी प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे। सरकारी दफ्तरों में भी सार्वजनिक अवकाश लागू होगा, इसलिए प्रमाणपत्र बनवाने, आवेदन जमा करने या किसी अधिकारी से मिलने जैसे काम सोमवार को नहीं हो पाएंगे।
दूसरी ओर, बैंक और वित्तीय संस्थान सामान्य रूप से खुले रहेंगे। इसका कारण यह है कि यह अवकाश नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 के तहत घोषित अवकाशों की श्रेणी में नहीं आता। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में भी यही स्थिति स्पष्ट की गई है। इसलिए जिन लोगों को बैंक से जुड़ा काम है, वे सोमवार को अपनी शाखा जा सकते हैं, लेकिन जाने से पहले अपनी शाखा की समय-सारणी की पुष्टि कर लेना बेहतर होगा।
अस्पतालों की आपातकालीन सेवाएं, पुलिस और अग्निशमन जैसी आवश्यक सेवाएं सामान्य व्यवस्था से जारी रहेंगी। किसी संस्थान में पहले से तय परीक्षा या विशेष ड्यूटी के लिए अलग निर्देश हो सकते हैं, इसलिए स्कूल की सूचना भी देख लें।
## हर जिले में रामायण पाठ, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम
वाल्मीकि जयंती को केवल छुट्टी के दिन के रूप में नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाने की तैयारी है। संस्कृति और पर्यटन विभाग की ओर से प्रदेश के सभी जिलों में रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए प्रत्येक जिले को एक लाख रुपये का विशेष बजट दिया गया है, ताकि आयोजन व्यवस्थित और गरिमापूर्ण तरीके से हो सकें।
जिलों के प्रमुख श्रीराम और हनुमान मंदिरों तथा रामायण काल से जुड़े धार्मिक स्थलों पर 8, 12 या 24 घंटे का वाल्मीकि रामायण पाठ होगा। इसके साथ दीपदान का भी आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को रामायण के मूल्यों से जोड़ना है। रामायण में मर्यादा, कर्तव्य, त्याग और सामाजिक समरसता के जो संदेश हैं, वे आज भी उतने ही प्रासंगिक माने जाते हैं।
## चित्रकूट की तपोस्थली पर होगा भव्य आयोजन
इस बार का सबसे बड़ा आकर्षण चित्रकूट स्थित लालापुर में महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली पर होने वाला भव्य कार्यक्रम होगा। मान्यता है कि यहीं महर्षि वाल्मीकि ने तपस्या की थी और रामायण की रचना से जुड़ी परंपरा यहीं से जुड़ी है। इसलिए लालापुर का आयोजन केवल एक जिले का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन जाता है।
चित्रकूट में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। प्रशासन व्यवस्था और सुरक्षा की तैयारी कर रहा है। श्रद्धालुओं को भीड़ में धैर्य रखने और निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
## लंबे समय की मांग के बाद बहाल हुआ था अवकाश
वाल्मीकि जयंती पर सार्वजनिक अवकाश की बहाली अपने आप में एक लंबी प्रक्रिया का परिणाम है। अखिल भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज की ओर से पहले रद्द किए गए इस अवकाश को दोबारा बहाल करने की मांग को लेकर लगातार ज्ञापन दिए जा रहे थे। समाज के प्रतिनिधियों का कहना था कि महर्षि वाल्मीकि की जयंती प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा अवसर है और इसे सार्वजनिक अवकाश के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए।
इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रावस्ती दौरे के दौरान वाल्मीकि जयंती पर प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश बहाल करने का ऐलान किया था। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इसका औपचारिक आदेश जारी कर दिया। इस फैसले के बाद वाल्मीकि समाज में खुशी देखी गई और अब हर वर्ष इस दिन प्रदेशभर में आयोजन होते हैं। यह उदाहरण बताता है कि जनभावनाओं से जुड़े फैसले किस तरह शासन और समाज के बीच संवाद से आगे बढ़ते हैं।
## आम लोगों के लिए जरूरी सलाह
अवकाश के दिन किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए कुछ छोटी सावधानियां काम आ सकती हैं। अगर आपका कोई सरकारी काम सोमवार को तय था, तो उसे मंगलवार के लिए टाल दें या संबंधित कार्यालय से पहले ही संपर्क करके जानकारी ले लें। विद्यार्थी अपने स्कूल की ओर से जारी संदेश जरूर देखें, क्योंकि कुछ संस्थानों में पहले से तय परीक्षा या विशेष कार्यक्रम के लिए अलग व्यवस्था हो सकती है।
बैंक खुले रहने के बावजूद सरकारी कार्यालयों से जुड़े कुछ काम प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें। मंदिर जाने वाले लोग पानी और जरूरी दवाएं साथ रखें तथा भीड़ में बच्चों का ध्यान रखें।
## वाल्मीकि का संदेश आज भी रास्ता दिखाता है
महर्षि वाल्मीकि की जयंती हमें यह याद दिलाती है कि साहित्य और संस्कृति किसी समाज की आत्मा होते हैं। रामायण की कथा केवल एक प्राचीन ग्रंथ नहीं है, बल्कि उसमें जीवन के हर मोड़ पर सही निर्णय लेने की प्रेरणा छिपी है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन के माध्यम से कर्तव्य, धैर्य और करुणा का जो संदेश दिया गया है, वह हर पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है।
इसलिए इस अवकाश का सही उपयोग केवल आराम तक सीमित नहीं होना चाहिए। परिवार के साथ रामायण के किसी प्रसंग पर चर्चा करना, बच्चों को वाल्मीकि के जीवन से परिचित कराना और समाज में समरसता का संदेश फैलाना इस दिन को सार्थक बना सकता है। उत्तर प्रदेश में इस वर्ष वाल्मीकि जयंती का उत्सव इसी भावना के साथ मनाया जा रहा है, जहां छुट्टी, आस्था और संस्कृति एक साथ नजर आ रही हैं।
