भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को जोरदार वापसी देखने को मिली। दो दिन की गिरावट के बाद निवेशकों का भरोसा लौटा और प्रमुख सूचकांक एक प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 905.01 अंक यानी 1.24 प्रतिशत चढ़कर 74,151.04 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 237.90 अंक यानी 1.05 प्रतिशत बढ़कर 22,936.75 पर बंद हुआ। दिन में सेंसेक्स 74,166.16 और निफ्टी 22,961.95 के उच्च स्तर तक गए।
इस तेजी के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे थे। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने का फैसला किया था। इससे वैश्विक निवेशकों को राहत मिली और जोखिम लेने की भावना मजबूत हुई। कच्चे तेल की कीमतों में हल्की नरमी भी भारत के लिए अच्छी खबर रही। इसके साथ ही बैंकिंग और रोजमर्रा के सामान वाली कंपनियों के शेयरों में भारी खरीदारी हुई, जिसने सूचकांकों को ऊपर धकेल दिया।
फेड के फैसले ने कैसे बदला माहौल
फेडरल रिजर्व ने नीतिगत ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत की सीमा में बनाए रखा। बाजार पहले से इसी फैसले की उम्मीद कर रहा था, लेकिन फैसले के बाद के संकेतों ने निवेशकों को भरोसा दिया कि दरों को लेकर जल्दबाजी नहीं होगी। अमेरिका में दर स्थिर रहने से उभरते बाजारों से पैसा निकलने का डर कम हो जाता है। भारतीय बाजार में भी यही भावना दिखी और शुरुआती सतर्क कारोबार के बाद खरीदारी तेज हो गई।
हालांकि, यह राहत बिना चिंता के नहीं थी। ब्रेंट कच्चा तेल 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा, जो ऊंचा स्तर है। रुपये पर भी दबाव दिखा। रुपया दिन की शुरुआत में 11 पैसे मजबूत होकर 95.17 पर खुला, लेकिन दिन में 95.37 के करीब दो सप्ताह के निचले स्तर तक चला गया। विश्लेषकों के अनुसार, तेल की कीमत और महीने के अंत में आयातकों की डॉलर मांग ने रुपये पर दबाव बनाया। इसके बावजूद शेयर बाजार ने मजबूती बनाए रखी।
बैंकिंग और एफएमसीजी शेयरों ने संभाली कमान
गुरुवार के कारोबार में बैंकिंग शेयर सबसे आगे रहे। कोटक महिंद्रा बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस में अच्छी खरीदारी हुई। रोजमर्रा के सामान वाले क्षेत्र में हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे शेयरों ने भी सूचकांक को सहारा दिया। रियल्टी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी तेजी में आगे रहे। रिपोर्टों के अनुसार, निफ्टी रियल्टी, एफएमसीजी और पीएसयू बैंक क्षेत्रीय सूचकांकों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई।
दूसरी ओर, ऑटो क्षेत्र ही एकमात्र बड़ा क्षेत्र रहा जो गिरावट के साथ बंद हुआ। मारुति सुजुकी और बजाज ऑटो दबाव में रहे। ट्रेंट का शेयर भी गिरने वालों में रहा। इससे साफ हुआ कि तेजी व्यापक थी, लेकिन हर क्षेत्र एक जैसा प्रदर्शन नहीं कर रहा था। निवेशक अब कंपनियों के नतीजों को देखकर चुनिंदा शेयरों में पैसा लगा रहे हैं, न कि हर शेयर में बिना सोचे खरीदारी कर रहे हैं।
अदाणी पोर्ट्स के नतीजों ने बढ़ाया भरोसा
दिन के सबसे चर्चित शेयरों में अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन सबसे ऊपर रहा। कंपनी ने सितंबर तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 18 प्रतिशत बढ़कर 3,682.44 करोड़ रुपये दर्ज किया। परिचालन से राजस्व 24 प्रतिशत बढ़कर 11,340 करोड़ रुपये पहुंचा। ईबीआईटीडीए 23 प्रतिशत बढ़कर 6,807 करोड़ रुपये रहा। इन मजबूत नतीजों के बाद शेयर 5 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा और सेंसेक्स का सबसे ज्यादा बढ़ने वाला शेयर बन गया।
अदाणी एंटरप्राइजेज, पावर ग्रिड, इटरनल, टाइटन, एनटीपीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफोसिस भी बढ़त के साथ बंद हुए। अदाणी पोर्ट्स ने पूरे वित्त वर्ष के लिए राजस्व और ईबीआईटीडीए का अनुमान 1,000 करोड़ रुपये बढ़ा दिया है। कंपनी अब वित्त वर्ष 2027 में 44,000 करोड़ से 46,000 करोड़ रुपये राजस्व और 26,000 करोड़ से 27,000 करोड़ रुपये ईबीआईटीडीए की उम्मीद कर रही है। घरेलू बंदरगाहों का राजस्व 13 प्रतिशत बढ़कर 7,177 करोड़ रुपये रहा और कार्गो मात्रा 118 मिलियन टन तक पहुंची।
निवेशकों के लिए आगे क्या मायने रखता है
बाजार के जानकारों का कहना है कि एक दिन की तेजी से लंबी अवधि की तस्वीर पूरी तरह नहीं बदलती। निफ्टी अब भी अपने 50 दिन के औसत से नीचे कारोबार कर रहा था, जो सतर्कता का संकेत माना जाता है। निवेशकों की नजर अब 30 अक्टूबर को आने वाले बड़े नतीजों पर रहेगी, जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, बैंक ऑफ बड़ौदा और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं। कच्चे तेल, रुपये और वैश्विक संकेत भी बाजार की दिशा तय करेंगे।
वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2027 में भी विस्तार बनाए रख सकती है, लेकिन कच्चे तेल, खाद्य महंगाई और अल नीनो जैसे जोखिम बने हुए हैं। विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 721 अरब डॉलर के करीब है, जो 10.3 महीने के आयात के लिए पर्याप्त बताया गया है। यह स्थिति अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से कुछ सुरक्षा देती है।
छोटे निवेशकों के लिए सावधानी का संदेश
बाजार की इस तेजी में छोटे निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात धैर्य और संतुलन है। एक दिन की बड़ी बढ़त देखकर जल्दबाजी में पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले कंपनी के नतीजे, कर्ज का स्तर और कारोबार की मजबूती को समझें। केवल सूचकांक की बढ़त देखकर यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि हर शेयर ऊपर जाएगा। गुरुवार को भी कई शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।
निवेशकों को अपने लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार फैसले लेने चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट कभी-कभी अच्छे शेयरों को उचित कीमत पर खरीदने का मौका देती है, लेकिन इसके लिए धैर्य और जानकारी दोनों जरूरी हैं। फिलहाल, 29 अक्टूबर की तेजी ने यह संदेश दिया है कि भारतीय बाजार में भरोसा लौट रहा है, लेकिन सतर्कता बनाए रखना उतना ही जरूरी है।
