यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूक्रेन की सेना ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोक दिए हैं। रॉयटर्स ने इस रिपोर्ट के बारे में खबर देते हुए साफ कहा है कि वह इस रिपोर्ट की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है। यूक्रेन ने भी अब तक हमले रोकने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए इस खबर को एक रिपोर्ट किए गए दावे के रूप में देखा जाना चाहिए, स्थापित तथ्य के रूप में नहीं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह अनौपचारिक रोक अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के बाद तक जारी रह सकती है और संभव है कि नवंबर में और आगे भी बनी रहे। अमेरिका में तीन नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर के मध्य में लंबी दूरी के हमलों में लगी यूक्रेनी इकाइयों को कहा गया था कि जो अभियान पहले से चल रहे हैं, वे पूरे होने के बाद रिफाइनरियों के खिलाफ अभियान को प्रभावी रूप से रोक दिया जाए।
यह खबर ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका शांति वार्ता को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहा है।
रिपोर्ट में हमलों के रुकने को लेकर क्या कहा गया
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इस रिपोर्ट के लिए उन लोगों का हवाला दिया है, जिन्हें सैन्य अभियानों की जानकारी है। रिपोर्ट के अनुसार, यह रोक पिछले सप्ताह की शुरुआत से शुरू हुई थी। यूक्रेन की ओर से रूसी तेल ढांचे पर कथित तौर पर आखिरी हमला 20 अक्टूबर को रूस के तांबोव क्षेत्र में एक पंपिंग स्टेशन पर हुआ था। उसके बाद से रूसी तेल ढांचे पर किसी नए हमले की खबर नहीं आई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जेलेंस्की ने मंगलवार को कहा था कि उनकी सेना के पास रिफाइनरियों से बचने का कोई आदेश नहीं है। उन्होंने कहा था कि यूक्रेन ने इस महीने की शुरुआत में वाशिंगटन के अनुरोध पर 72 घंटों तक हमले रोके थे, जबकि रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा क्षेत्र पर हमले जारी रखे थे।
इस पृष्ठभूमि में ताजा रिपोर्ट को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर रिपोर्ट में अनौपचारिक रोक की बात कही गई है, तो दूसरी ओर जेलेंस्की के बयान से लगता है कि यूक्रेन ने औपचारिक रूप से हमले रोकने का आदेश नहीं दिया है। यह संभव है कि जमीनी स्तर पर हमलों में कमी आई हो, लेकिन उसकी वजह और अवधि को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है।
ट्रंप प्रशासन क्यों चाहता है कि हमले रुकें
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन यूक्रेन पर रिफाइनरियों पर हमले रोकने का दबाव पिछले कुछ हफ्तों से बना रहा था। ट्रंप का मानना है कि इन हमलों के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, खासकर डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऊर्जा विशेषज्ञ कीमतों में बढ़ोतरी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को मानते हैं, न कि सिर्फ यूक्रेनी हमलों को।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के विशेष दूत जेरेड कुशनर ने 20 अक्टूबर को ओस्लो में जेलेंस्की से मुलाकात के दौरान रिफाइनरियों पर 30 दिनों तक हमले रोकने की बात कही थी। कुशनर ने इसे मॉस्को के साथ शांति वार्ता में वाशिंगटन की मध्यस्थता के लिए आभार जताने के संकेत के रूप में पेश किया था। ट्रंप और जेलेंस्की के बीच संबंधों में हाल के हफ्तों में गिरावट आई है। ट्रंप रूसी ऊर्जा ढांचे पर यूक्रेनी हमलों को लेकर लगातार नाराजगी जता रहे हैं।
स्टारलिंक सेवा को लेकर भी विवाद हुआ था, जिसकी पूरी सेवा 24 अक्टूबर को बहाल हो सकी। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि यह मुद्दा रिफाइनरी हमलों से जुड़ा नहीं था।
यूक्रेन के लिए रिफाइनरी अभियान क्यों अहम है
यूक्रेन के लिए रूसी रिफाइनरियों पर हमले सिर्फ एक सैन्य रणनीति नहीं हैं, बल्कि आर्थिक दबाव का भी एक साधन हैं। यूक्रेन का कहना है कि इन हमलों का मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, जिससे रूस के युद्ध को मिलने वाली आर्थिक मदद घटे। यूक्रेन को डर है कि अगर यह अभियान बंद हो गया, तो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्ध लंबा खींचने में मदद मिलेगी।
यूक्रेन ने पहले भी कहा था कि वह हमले रोकने से इनकार करता है, क्योंकि लंबी दूरी के ड्रोन अभियान ही रूस की बमबारी का उसका एकमात्र व्यवहार्य जवाब है। रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा और नागरिक ढांचे पर हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रूस के हमलों में गुरुवार को यूक्रेन भर में कम से कम 20 लोग मारे गए, जिनमें द्निप्रो में एक रेलवे प्लेटफॉर्म पर ड्रोन हमले में 14 लोग शामिल थे। यह आंकड़ा रॉयटर्स की खबर में सामने आया है।
पुष्टि का इंतजार क्यों जरूरी है
इस पूरी खबर में सबसे अहम बात यह है कि अभी तक इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रॉयटर्स ने साफ कहा है कि वह वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट की पुष्टि नहीं कर सका है। यूक्रेन ने कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। रूस की ओर से भी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि हमले पूरी तरह और स्थायी रूप से रुक गए हैं।
आने वाले दिनों में और जानकारी सामने आ सकती है। अगर रूसी तेल ढांचे पर कोई नया हमला होता है, तो रोक की खबर कमजोर पड़ जाएगी। अगर कई हफ्तों तक कोई हमला नहीं होता, तो रिपोर्ट को और मजबूती मिलेगी।
