Sunday, 25 October 2026

बदलते मौसम में डेंगू और वायरल बुखार का डबल अटैक, जानें बचाव के आसान उपाय

डेंगू और वायरल बुखार से बचाव के लिए मच्छर नियंत्रण और सावधानी

अक्टूबर का महीना हर साल मौसम के बदलाव का महीना होता है। दिन में धूप तेज लगती है और सुबह-शाम हल्की ठंड महसूस होने लगती है। तापमान के इसी उतार-चढ़ाव के बीच शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर दबाव बढ़ जाता है। यही वजह है कि इस समय डेंगू और वायरल बुखार जैसे संक्रमण तेजी से फैलते हैं। ताजा आंकड़े भी इसी चिंता की ओर इशारा कर रहे हैं। एक शहर में अक्टूबर के महीने में डेंगू के मरीजों की संख्या में उछाल देखा गया है, तो दूसरे शहर में अस्पतालों की ओपीडी में वायरल बुखार के मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

डेंगू के मामले क्यों बढ़ रहे हैं

नागपुर से सामने आए आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर महीने में अब तक डेंगू के 72 मरीज मिल चुके हैं। जनवरी से अक्टूबर तक शहर में डेंगू के कुल 180 मामले दर्ज हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अक्टूबर में डेंगू के मामलों में सितंबर की तुलना में 56 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान बारिश नहीं हुई, फिर भी मरीजों की संख्या बढ़ी। विशेषज्ञों का मानना है कि घरों में जमा साफ पानी ही डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर के पनपने की सबसे बड़ी वजह बनता है।

एडीज मच्छर दिन के समय काटता है और साफ, रुके हुए पानी में अंडे देता है। कूलर, गमले, छत पर रखे बर्तन, टंकी का खुला ढक्कन और पुराने टायर जैसी जगहें इसके लिए मुफीद होती हैं। इसलिए सिर्फ दवा छिड़कने से काम नहीं चलेगा। हर घर को अपने आसपास पानी जमा न होने देना होगा। पानी के बर्तनों को ढककर रखना, हर हफ्ते उनकी सफाई करना और कूलर का पानी बदलना बेहद जरूरी है।

वायरल बुखार की लहर भी तेज

दूसरी ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में वायरल बुखार और खांसी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। वहां सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले कुल मरीजों में लगभग 40 प्रतिशत लोग तेज बुखार, गले में खराश और तेज खांसी से परेशान पाए गए हैं। वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार इस समय मौसमी विषाणु सक्रिय हैं, जिनसे दो से चार दिन तक तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, नाक बंद होना, छींकें और कमजोरी महसूस होती है।

कई मरीजों में बुखार उतरने के बाद भी करीब दो हफ्ते तक सूखी या बलगम वाली खांसी बनी रहती है। चिकित्सा की भाषा में इसे पोस्ट वायरल कफ कहा जाता है। यह आमतौर पर धीरे-धीरे ठीक हो जाता है, लेकिन अगर खांसी लंबी खिंचे, सांस लेने में दिक्कत हो या बुखार दोबारा लौट आए तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से बीमार लोगों में सामान्य संक्रमण भी निमोनिया का रूप ले सकता है, इसलिए इन वर्गों में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।

डेंगू और वायरल में फर्क कैसे पहचानें

आम लोग अक्सर हर बुखार को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि डेंगू और वायरल बुखार में कुछ फर्क होता है। वायरल बुखार में आमतौर पर सर्दी, जुकाम, गले में खराश और बदन दर्द ज्यादा दिखता है। डेंगू में तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द, त्वचा पर चकत्ते और कभी-कभी मसूड़ों या नाक से खून आना जैसे लक्षण हो सकते हैं। प्लेटलेट्स कम होने की बात भी डेंगू में सामने आती है।

हालांकि लक्षणों के आधार पर खुद निदान करना सही नहीं है। बुखार दो दिन से ज्यादा रहे, तेज सिरदर्द हो, उल्टी लगे, शरीर पर चकत्ते दिखें या कमजोरी बहुत ज्यादा हो तो तुरंत जांच करानी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना पेनकिलर या एंटीबायोटिक लेना नुकसानदायक हो सकता है। खासकर डेंगू के शक में कुछ दर्द निवारक दवाएं खून बहने का खतरा बढ़ा सकती हैं, इसलिए बिना सलाह कोई दवा न लें।

बचाव के आसान और असरदार उपाय

बचाव के लिए बड़े बदलावों की जरूरत नहीं है, बल्कि छोटी-छोटी आदतें ही काफी हैं। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। पूरी बाजू के कपड़े पहनें और सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें और बीमार व्यक्ति से थोड़ी दूरी बनाए रखें। हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोना संक्रमण फैलने से रोकता है।

खानपान में भी ध्यान रखना जरूरी है। पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लेते रहें। मौसमी फल, हरी सब्जियां और संतुलित आहार शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। दिन में तीन से चार बार गुनगुने पानी से गरारे करना और भाप लेना गले की खराश और बंद नाक में राहत देता है। थकान महसूस होने पर आराम करना भी इलाज का हिस्सा है, क्योंकि शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए ऊर्जा चाहिए।

स्वाइन फ्लू के मामलों में राहत की खबर

इसी बीच एक राहत भरी खबर भी है। नागपुर में स्वाइन फ्लू के मामलों में गिरावट दर्ज की गई है। सितंबर में जहां स्वाइन फ्लू के 128 मरीज मिले थे, वहीं अक्टूबर के शुरुआती 18 दिनों में यह संख्या घटकर 22 रह गई है। जनवरी से अब तक शहर में स्वाइन फ्लू के कुल 229 मामले सामने आए हैं। सितंबर और अक्टूबर के शुरुआती दिनों में कोविड के नए मामले भी सामने नहीं आए हैं। यह बताता है कि सावधानी और समय पर इलाज से संक्रमण की रफ्तार को कम किया जा सकता है।

निष्कर्ष: सावधानी ही सबसे अच्छी दवा है

मौसम बदल रहा है और इसके साथ बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। डेंगू से बचने के लिए मच्छरों के पनपने की जगह खत्म करना और वायरल बुखार से बचने के लिए साफ-सफाई, पर्याप्त आराम और सही खानपान अपनाना जरूरी है। बुखार को हल्के में न लें, लेकिन घबराएं भी नहीं। लक्षण बढ़ने पर समय पर डॉक्टर से मिलें और बिना सलाह दवा लेने से बचें। छोटी-सी सावधानी आपको और आपके परिवार को बड़े खतरे से बचा सकती है।

नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

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राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं, देश-राज्य की राजनीति और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबरों पर लेखन। बिजनेस और स्पोर्ट्स की खबरें भी। ब्रेकिंग न्यूज की होड़ के बीच डिजिटल मीडिया में एआई जैसे नवाचार की नर्सरी का छात्र।