बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में जांच रोज नए खुलासे कर रही है। गुरुवार 22 अक्टूबर को मुंबई की अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों को 26 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 20 अक्टूबर को जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया था, उनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि हथियारों को अमृतसर से मुंबई तक पहुंचाने के लिए 'डेड लेटर बॉक्स' नाम के एक खास तरीके का इस्तेमाल किया गया था और पूरी साजिश के तार कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े एक शख्स से जुड़े हैं।
18 अक्टूबर की रात: जुहू में टाइगर की कार पर गोलीबारी
18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर गोलीबारी की गई थी। गनीमत रही कि इस घटना में अभिनेता सुरक्षित रहे। घटना के बाद पुलिस ने कथित शूटरों की तलाश शुरू की और राजस्थान के कोटा से तीन संदिग्धों को पकड़ने की रिपोर्ट सामने आई। बाद में उन्हें मुंबई पुलिस को सौंप दिया गया। जांच में पता चला कि आरोपियों ने करीब सात दिनों तक टाइगर श्रॉफ की गतिविधियों की रेकी की थी। उन्हें जानकारी थी कि अभिनेता हर रविवार शाम फुटबॉल खेलने आते हैं। गूगल के जरिए भी उन्होंने टाइगर से जुड़ी जानकारी जुटाई थी और सेल्फी लेने के बहाने कार के पास पहुंचने की योजना बनाई थी। भीड़ के बावजूद हमलावरों ने पार्क के बाहर टाइगर की कार पर फायरिंग कर दी।
'डेड लेटर बॉक्स' तरीका: ऐसे पहुंचा अमृतसर से पिस्तौल
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों ने हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए 'डेड लेटर बॉक्स' तरीके का इस्तेमाल किया। इस व्यवस्था में कोई व्यक्ति पहले से तय स्थान पर सामान छोड़ देता है और दूसरा व्यक्ति वहां से उसे उठा लेता है। इस प्रक्रिया में दोनों लोगों का सीधे मिलना जरूरी नहीं होता, जिससे पकड़े जाने का खतरा कम रहता है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कुणाल और सुमित फायरिंग की घटना से लगभग दो सप्ताह पहले अमृतसर गए थे। वहां उन्होंने कथित तौर पर एक तय स्थान से पिस्तौल और 20 कारतूस प्राप्त किए। जांचकर्ताओं का कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि हथियार उस जगह पर किसने छोड़े थे। इसके साथ ही आरोपियों के बीच संपर्क बनाए रखने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल किया गया था, ताकि हथियारों की सप्लाई में शामिल लोगों को आमने-सामने न आना पड़े। पुलिस अब डिजिटल बातचीत, फोन रिकॉर्ड, पैसों के लेनदेन और आरोपियों की आवाजाही से जुड़े सबूतों की पड़ताल कर रही है, ताकि हथियारों के मूल स्रोत का पता लगाया जा सके।
हथियार पहुंचाने में दो महिलाओं की कथित भूमिका
जांच के अनुसार, अमृतसर से हथियार लेने के बाद उन्हें मुंबई पहुंचाने की जिम्मेदारी कथित तौर पर राधा और बबीता को दी गई थी। गिरफ्तार चारों आरोपियों की पहचान हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले कुणाल (21) और सुमित (19), उत्तर प्रदेश के सीतापुर की रहने वाली राधा (23) और उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ की रहने वाली बबीता (23) के रूप में हुई है।
पुलिस के मुताबिक, कुणाल हाल ही में जमानत पर जेल से बाहर आया था। वह एक दोस्त के जरिए अनिल पंडित से मिला था। पुलिस का आरोप है कि अनिल पंडित के कहने पर कुणाल अमृतसर से एक पिस्तौल और 20 कारतूस लेकर आया था और सुमित भी यात्रा के दौरान उसके साथ था। घटना से करीब दो महीने पहले कुणाल की मुलाकात राधा से हुई थी, जिसे उसने हथियार लेकर मुंबई जाने के लिए राजी कर लिया। 15 अक्टूबर को पिस्तौल राधा के बैग में रखकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से रवाना हुए और 17 अक्टूबर को राधा-बबीता दादर पहुंचीं। उसी दिन सुबह करीब 11 बजे एक नाबालिग लड़का होटल के पास राधा से वह बैग ले गया।
पैसों का खेल: 70 से 80 हजार में बिकी साजिश
पुलिस सूत्रों का दावा है कि हथियारों की व्यवस्था करने के लिए अनिल पंडित ने कुणाल और सुमित को लगभग 70,000 से 80,000 रुपये दिए थे। इनमें से करीब 10,000 से 12,000 रुपये कथित तौर पर दोनों महिलाओं को दिए गए थे। पुलिस के मुताबिक, कुणाल ने राधा से अपने संबंधों का इस्तेमाल कर उसे इस काम के लिए तैयार किया था।
जांच में सामने आया है कि हमले से पहले आरोपियों ने अंधेरी के एक होटल के कमरे में हथियार की जांच के दौरान फायरिंग की थी, ताकि यह परखा जा सके कि हथियार सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं। इसी दौरान गलती से एक गोली चल गई थी, जो कमरे के बिस्तर पर लगी, लेकिन होटल के कर्मचारियों को कोई शक नहीं हुआ।
अदालत का फैसला और आगे की जांच
गुरुवार को चारों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने सभी को 26 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। इससे पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की एनडीआर यूनिट ने इन्हें अदालत में पेश किया था। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस की सीआईडी, मुंबई ने अदालत से चारों आरोपियों की हिरासत में पूछताछ और औपचारिक गिरफ्तारी की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।
रिपोर्टों के अनुसार, घटना के बाद आरोपी गुजरात के सूरत भाग गए थे। वहां से वे जयपुर जाने वाली ट्रेन में सवार हुए। बताया जा रहा है कि उनकी योजना पहले नई दिल्ली पहुंचने और फिर वहां से नेपाल फरार होने की थी, लेकिन दिल्ली पहुंचने से पहले ही राजस्थान के कोटा में मुंबई पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
फिलहाल मामले में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ आरोप जांच के अधीन हैं। पुलिस इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से कथित संबंधों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, हथियारों की सप्लाई, आरोपियों के बीच संपर्क और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का उद्देश्य हथियारों के मूल स्रोत और सप्लाई नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करना है। मामले की आगे की जांच जारी है और आरोपियों से पूछताछ भी हो रही है।
