Wednesday, 21 October 2026

‘मैं शिव-शक्ति में विश्वास करता हूं’: RSS पर राहुल गांधी का तीखा हमला, संघ को बताया पुरुषवादी और असंवैधानिक संगठन

राहुल गांधी — RSS पर बयान के बाद चर्चा में

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी और संघ के स्थापना दिवस के मौके पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए संघ को “पुरुषवादी” और “असंवैधानिक” संगठन करार दिया। उनके इस बयान के बाद देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

एक्स पोस्ट में क्या लिखा राहुल गांधी ने?

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा, “RSS एक पुरुष प्रधान, असंवैधानिक संप्रदाय है, जो मानता है कि महिलाएं पुरुषों की संपत्ति हैं। मैं शिव-शक्ति में विश्वास करता हूं। इसीलिए उनसे लड़ने में मुझे खुशी मिलती है।” उन्होंने आगे दावा किया कि संघ से जुड़े परिवारों की कई महिलाएं भी इस लड़ाई में उनके साथ खड़ी हैं।

राहुल ने संघ की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह संगठन भारतीय संविधान की मूल भावना के खिलाफ काम करता है। महिलाओं की स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि संघ की सोच महिलाओं को पुरुषों के अधीन मानती है, जो सामाजिक और संवैधानिक दोनों दृष्टि से गलत है।

विजयादशमी और संघ के स्थापना दिवस का संदर्भ

राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपना स्थापना दिवस मना रहा था। इस साल संघ का शताब्दी वर्ष भी चल रहा है, इसलिए यह बयान और भी अहम माना जा रहा है। विजयादशमी के मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में अपना वार्षिक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने संघ, संविधान, हिंदू धर्म और देश के विकास पर अपने विचार रखे।

भागवत ने अपने भाषण में तुष्टिकरण की नीति पर भी टिप्पणी की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भागवत के इस भाषण का समर्थन किया और इसे राष्ट्रीय प्रगति व सामाजिक एकजुटता की दिशा में महत्वपूर्ण बताया था। राहुल गांधी का हमला इसी भाषण के कुछ समय बाद आया, जिसे राजनीतिक हलकों में सीधी प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

पांच नेताओं को ‘विलेन’ बताने पर विवाद

कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी ने इस दौरान देश के शीर्ष नेतृत्व के पांच नामों को मौजूदा राजनीतिक कहानी के “विलेन” के तौर पर भी पेश किया। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, संघ प्रमुख मोहन भागवत, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के नाम शामिल बताए गए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार राहुल ने कहा कि ये सभी नेता धीरे-धीरे घिरते जा रहे हैं और विपक्ष उनके चारों ओर घेराबंदी कर रहा है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने विरोध प्रदर्शनों में जोश बनाए रखें और कहा कि विपक्ष संविधान की रक्षा के लिए पीछे नहीं हटेगा।

भाजपा का पलटवार: आरोपों को बताया निराधार

राहुल गांधी के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि संघ एक राष्ट्रवादी सांस्कृतिक संगठन है और उस पर लगाए गए आरोप राजनीतिक मंशा से प्रेरित हैं।

भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने राहुल गांधी के हालिया वियतनाम दौरे पर सवाल उठाए। उन्होंने राहुल से उनकी विदेश यात्राओं के खर्च और वहां हुई मुलाकातों का सार्वजनिक ब्योरा देने की मांग की। इस तरह दोनों पक्षों के बीच टकराव और बढ़ गया है, और यह विवाद अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है।

सियासी मायने: महिला अधिकार और संविधान का मुद्दा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी ने इस बयान के जरिए दो बड़े मुद्दों को एक साथ उठाने की कोशिश की है — महिला अधिकार और संविधान की रक्षा। संघ की शाखाओं में महिलाओं की भागीदारी का सवाल पहले भी उठता रहा है, और राहुल ने उसी बिंदु को अपने हमले का केंद्र बनाया है।

दूसरी ओर, भाजपा इसे संघ के शताब्दी वर्ष में संगठन को बदनाम करने की कोशिश के तौर पर पेश कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बयानबाजी किन राजनीतिक समीकरणों को जन्म देती है, खासकर उन राज्यों में जहां चुनावी माहौल बन रहा है।

पहले भी उठा चुके हैं यही मुद्दा

यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने संघ में महिलाओं की भागीदारी का मुद्दा उठाया हो। साल 2018 में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित “महिला अधिकार सम्मेलन” में भी उन्होंने RSS को “पुरुषवादी संगठन” बताते हुए कहा था कि जिस संगठन में आधी आबादी के लिए शीर्ष स्तर पर कोई जगह नहीं, वह आधुनिक भारत की बात कैसे कर सकता है। उस समय उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक का भी पुरजोर समर्थन किया था। ताजा बयान उसी पुरानी विचारधारा की लड़ाई का नया अध्याय माना जा रहा है।

आगे क्या?

राहुल गांधी के इस बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में वैचारिक टकराव को एक बार फिर सतह पर ला दिया है। एक तरफ कांग्रेस और विपक्षी दल इसे संविधान व महिला अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा और संघ समर्थक इसे राजनीतिक स्टंट करार दे रहे हैं। यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है, और इसकी गूंज संसद से लेकर सड़क तक सुनाई देने की संभावना है।

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राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं, देश-राज्य की राजनीति और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबरों पर लेखन। बिजनेस और स्पोर्ट्स की खबरें भी। ब्रेकिंग न्यूज की होड़ के बीच डिजिटल मीडिया में एआई जैसे नवाचार की नर्सरी का छात्र।