Tuesday, 20 October 2026

मेघालय की राजनीति में बड़ा फेरबदल: UDP में फिर टूट, तीन विधायक आज NPP में हो सकते हैं शामिल

मेघालय राजनीति से जुड़ी तस्वीर

मेघालय की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर होने जा रहा है। सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी रही यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) को एक और बड़ा झटका लग सकता है। पार्टी के तीन और विधायक मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा की नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो राज्य के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।

UDP को एक के बाद एक झटके

UDP के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी के पास पहले 12 विधायक थे, लेकिन दल-बदल की आंधी में पार्टी लगातार कमजोर होती चली गई। इससे पहले पार्टी के 8 विधायक टूटकर BJP में शामिल हो गए थे, जिसके बाद UDP के पास सिर्फ 4 विधायक रह गए थे।

अब अगर तीन और विधायक NPP का दामन थामते हैं, तो UDP के पास महज एक विधायक रह जाएगा। एक समय राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाली क्षेत्रीय पार्टी के लिए यह अस्तित्व का संकट बन गया है।

NPP की ताकत कितनी बढ़ जाएगी?

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा की NPP लगातार मजबूत होती जा रही है। 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में NPP के पास फिलहाल 33 विधायक हैं। तीन और विधायकों के जुड़ने से यह संख्या बढ़कर 36 हो जाएगी।

इससे संगमा सरकार को और मजबूती मिलेगी और फैसले लेने में उसकी स्थिति पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ हो जाएगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि NPP राज्य में खुद को सबसे बड़ी ताकत के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है।

2028 के चुनाव से पहले बदलते समीकरण

मेघालय में विधानसभा चुनाव 2028 की शुरुआत में होने हैं। चुनाव से पहले हो रहा यह फेरबदल बेहद अहम माना जा रहा है। सत्तारूढ़ दल अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, जबकि क्षेत्रीय दल बिखरते नजर आ रहे हैं।

जानकारों का कहना है कि चुनाव आते-आते राज्य में गठबंधनों की तस्वीर और बदल सकती है। छोटे दलों के नेताओं का बड़े दलों की ओर रुख करना इसी का संकेत है।

अब आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ये तीनों विधायक आज ही NPP में शामिल होते हैं या मामला कुछ दिन और खिंचता है। विधायकों के दल बदलने से आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में और हलचल देखने को मिल सकती है।

UDP के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने बचे हुए संगठन को संभालने की है। देखना होगा कि पार्टी इस संकट से कैसे उबरती है और चुनाव से पहले खुद को फिर से खड़ा कर पाती है या नहीं।

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राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं, देश-राज्य की राजनीति और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबरों पर लेखन। बिजनेस और स्पोर्ट्स की खबरें भी। ब्रेकिंग न्यूज की होड़ के बीच डिजिटल मीडिया में एआई जैसे नवाचार की नर्सरी का छात्र।