Sunday, 1 November 2026

दिवाली पर घर नहीं, सफर: युवा यात्रियों ने बदल दी त्योहार की परिभाषा, अगत्ती से उदयपुर तक बुकिंग में उछाल

दिवाली यात्रा के दौरान लक्षद्वीप के अगत्ती द्वीप का फिरोजी समुद्र तट और नाव

दिवाली का नाम सुनते ही लंबे समय तक एक ही तस्वीर मन में बनती थी। घर की साफ-सफाई, बाजार की भीड़, मिठाइयों की खुशबू, दीयों की कतार और परिवार के साथ त्योहार मनाने की तैयारी। यह तस्वीर आज भी लाखों घरों में उतनी ही सच्ची है, लेकिन उसके साथ एक नई तस्वीर भी जुड़ गई है। अब बहुत से युवा दिवाली के दिनों में बैग पैक करके किसी नई जगह निकल जाना चाहते हैं। वे घर से दूर रहकर भी त्योहार मनाना चाहते हैं, बस अंदाज बदल गया है।

यात्रा से जुड़े ताजा आंकड़े बताते हैं कि दिवाली से पहले फ्लाइट और होटल की बुकिंग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी केवल प्रसिद्ध स्थलों तक सीमित नहीं है। लोग भीड़ से दूर शांत द्वीप, धार्मिक और ऐतिहासिक जगहें, पहाड़ी रास्ते और झीलों वाले शहर चुन रहे हैं। इस रुझान के पीछे अनुभव को महत्व देने वाली सोच और त्योहार को यादगार बनाने की कोशिश साफ दिखाई देती है।

युवा यात्रियों की बुकिंग में सबसे बड़ी छलांग

क्लियरट्रिप के पीकअबू यात्रा रुझान ट्रैकर के अनुसार, दिवाली 2026 से पहले पंद्रह से चौबीस वर्ष की आयु वाले यात्रियों में फ्लाइट बुकिंग में साठ प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी अवधि में अवकाश के लिए होटल बुकिंग में एक सौ पैंतीस प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ये आंकड़े पिछले वर्ष की तुलना में दर्ज किए गए हैं। वे बताते हैं कि युवा वर्ग त्योहार के समय यात्रा को पहले से कहीं अधिक प्राथमिकता दे रहा है।

होटल बुकिंग के आंकड़े इस बदलाव को और स्पष्ट करते हैं। बजट ठहरने की व्यवस्था में दो सौ एक प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। लक्जरी संपत्तियों में एक सौ बासठ प्रतिशत, मध्यम श्रेणी में एक सौ अड़तालीस प्रतिशत और प्रीमियम होटलों में एक सौ चौदह प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे पता चलता है कि सभी बजट वर्गों के यात्री अधिक यात्रा कर रहे हैं।

अगत्ती, गया और दिमापुर: नई पसंद बनती जगहें

घरेलू गंतव्यों में सबसे अधिक फ्लाइट बुकिंग वृद्धि लक्षद्वीप के अगत्ती द्वीप में दर्ज की गई है। वहां बुकिंग में एक सौ तीस प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अगत्ती अपने फिरोजी लैगून, प्रवाल भित्तियों और शांत समुद्र तटों के लिए जाना जाता है। यहां स्नॉर्कलिंग की जा सकती है और शांत दिन बिताए जा सकते हैं। हालांकि लक्षद्वीप की यात्रा के लिए पहले से योजना जरूरी है, क्योंकि अनुमति, स्थानांतरण और सीमित ठहरने की व्यवस्था का ध्यान रखना पड़ता है।

दूसरे स्थान पर बिहार का गया है, जहां फ्लाइट बुकिंग में अट्ठानबे प्रतिशत की वृद्धि हुई है। गया धार्मिक महत्व के साथ बोधगया का प्रवेश द्वार भी है। बोधगया में महाबोधि मंदिर है, जिसे बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति से जोड़ा जाता है। मंदिरों और शांत वातावरण के कारण यह जगह भीड़ से दूर अर्थपूर्ण समय बिताने वालों को आकर्षित करती है।

तीसरे स्थान पर नागालैंड का दिमापुर है, जहां बुकिंग में अस्सी प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। दिमापुर नागालैंड में प्रवेश का प्रमुख केंद्र है और यहां से कोहिमा तथा आसपास की पहाड़ियों की यात्रा शुरू की जा सकती है। स्थानीय बाजार और संस्कृति इसे स्थापित पर्यटन मार्गों से अलग पहचान देती हैं।

उदयपुर और बेंगलुरु में होटल बुकिंग का रिकॉर्ड

उदयपुर में होटल बुकिंग में तीन सौ सोलह प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस सूची में सबसे अधिक है। झीलों, महलों और विरासत वाले होटलों के लिए प्रसिद्ध उदयपुर लंबे समय से विशेष अवसरों के लिए पसंदीदा शहर रहा है। सिटी पैलेस और पिछोला झील की सवारी यहां इतिहास और सौंदर्य का अनुभव देती हैं।

बेंगलुरु में होटल बुकिंग में एक सौ नवासी प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह शहर तकनीक और कैफे संस्कृति के लिए जाना जाता है, लेकिन छोटी छुट्टी के लिए भी यहां बहुत कुछ है। रेस्तरां, खरीदारी और हरे-भरे स्थान इसे शहर में छुट्टी मनाने वालों के लिए आकर्षक बनाते हैं।

शांत दिवाली और समझदारी से यात्रा की योजना

कुछ यात्री भीड़, शोर और प्रदूषण से दूर शांत स्थान पर दो-तीन दिन बिताना पसंद कर रहे हैं। यात्रा की योजना बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। पहली बात, पहले से बुकिंग करें, खासतौर पर उन जगहों के लिए जहां अनुमति या सीमित ठहराव की व्यवस्था है। दूसरी बात, बजट पहले से तय करें और उसी के भीतर रहें। यात्रा के आंकड़े यह नहीं बताते कि यात्राएं कैसे वित्तपोषित की जा रही हैं, इसलिए कर्ज लेकर घूमने जैसी चर्चाओं को तथ्य मानकर नहीं चलना चाहिए। मौसम और परिवहन की जानकारी पहले से जुटाएं। छोटी तैयारियां यात्रा को सहज बनाती हैं।

दिवाली की यात्रा का यह बदलाव भारतीय जीवनशैली में एक व्यापक परिवर्तन की ओर संकेत करता है। त्योहार अब केवल रस्मों तक सीमित नहीं हैं। वे अनुभव, विश्राम और नई खोज से भी जुड़ गए हैं। युवा पीढ़ी परंपरा को छोड़ नहीं रही, वह उसे अपने तरीके से जी रही है। कभी वह घर लौटकर परिवार के साथ दीया जलाती है, तो कभी किसी नई जगह की रोशनी में त्योहार मनाती है। दोनों रूपों में दिवाली का मूल भाव एक ही रहता है। जगहें बदल सकती हैं, अंदाज बदल सकता है, लेकिन त्योहार मनाने की खुशी वही रहती है। रोशनी, उम्मीद, साथ और नई शुरुआत।

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राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं, देश-राज्य की राजनीति और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबरों पर लेखन। बिजनेस और स्पोर्ट्स की खबरें भी। ब्रेकिंग न्यूज की होड़ के बीच डिजिटल मीडिया में एआई जैसे नवाचार की नर्सरी का छात्र।