Sunday, 1 November 2026

चलो दिल्ली: एक नवंबर को रामलीला मैदान में महा रैली, राहुल गांधी बोले—जनता का गुस्सा दिखेगा

रामलीला मैदान में चलो दिल्ली मार्च से पहले तैयारियां और राहुल गांधी का संबोधन

देश की राजधानी दिल्ली में एक नवंबर को होने वाली विपक्ष की बड़ी रैली से पहले राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि रामलीला मैदान में होने वाला कार्यक्रम चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर जनता के गुस्से को दिखाएगा। उन्होंने दावा किया कि लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं और प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है। भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने और लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। इस टकराव के बीच दिल्ली पुलिस की अनुमति, व्यापारियों की चिंता और कार्यक्रम की तैयारियों पर भी बयान आ रहे हैं।

बारिश के कारण टला कार्यक्रम आज होगा

विपक्षी गठबंधन इंडिया का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग का कार्यक्रम पहले शुक्रवार को होना था, लेकिन दिल्ली में भारी बारिश के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। राहुल गांधी ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं को बारिश में बैठने में असुविधा होगी, इसलिए सर्वसम्मति से कार्यक्रम को शनिवार को उसी समय पर करने का फैसला हुआ। अब यह कार्यक्रम शनिवार, इकतीस अक्टूबर को दोपहर साढ़े तीन बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आधिकारिक आवास, दस राजाजी मार्ग पर होगा। इसमें संसदीय कार्यवाही का प्रतीकात्मक रूप प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई है। कुछ खबरों में कहा गया है कि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार इस कार्यवाही की अध्यक्षता कर सकती हैं, हालांकि अंतिम पुष्टि कार्यक्रम के समय ही होगी।

रामलीला मैदान में क्या होगा

कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने एक नवंबर के कार्यक्रम को वोट बचाओ, देश बचाओ जन मार्च और महा रैली का नाम दिया है। राहुल गांधी ने एक इंस्टाग्राम सत्र में बताया कि मार्च दोपहर बारह बजे मिंटो रोड और कनॉट प्लेस क्षेत्र से शुरू होकर रामलीला मैदान में समाप्त होगा। उन्होंने छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों सहित समाज के हर वर्ग से इसमें शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि यह किसी एक दल का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का साझा प्रयास है। दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम के लिए सशर्त अनुमति दी है।

राहुल गांधी के आरोप और दावे

राहुल गांधी ने कहा कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान कई पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और सवाल पूछने वालों पर पुलिस कार्रवाई हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए की जा रही है और इसका लाभ कुछ बड़े औद्योगिक घरानों और सत्ताधारी नेताओं को पहुंचाने का प्रयास हो रहा है। यह उनका आरोप है, जिसके समर्थन में उन्होंने सबूत पेश करने की बात भी कही है। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोगों को दिल्ली आने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना और पंजाब से आने वाले कार्यकर्ताओं और आम लोगों को रोका जा रहा है।

भाजपा का पलटवार और सबूत की मांग

भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली आने से किसी को नहीं रोका जा रहा है और विपक्ष झूठ फैला रहा है। उन्होंने विपक्ष से सबूत मांगा कि किसे, कहां और कैसे रोका गया है। पात्रा ने राहुल गांधी पर तंज भी किया। भाजपा नेता राम कदम ने कहा कि राहुल गांधी का आचरण संवैधानिक संस्थाओं का अपमान है और वे एक ओर संविधान का सम्मान करने की बात करते हैं, तो दूसरी ओर न्यायपालिका और चुनाव आयोग पर राजनीतिक दबाव बनाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष के पास चिंता, सबूत या सुझाव हैं, तो उन्हें सामने आकर पेश करना चाहिए, क्योंकि मतदाता सूची से जुड़े दावों के लिए समय सीमा भी बढ़ाई गई है।

व्यापारियों की अपील और आगे की रणनीति

रैली की तारीख को लेकर व्यापारियों ने भी चिंता जताई है। दिल्ली के व्यापारियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से अपील की है कि रैली को टाल दिया जाए, क्योंकि इससे दिवाली की खरीदारी से पहले प्रमुख बाजारों का कामकाज प्रभावित हो सकता है। संगठन का अनुमान है कि रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, करोल बाग और दरियागंज सहित करीब बीस बड़े बाजार प्रभावित हो सकते हैं। संगठन के अनुसार रैली में करीब दस लाख लोगों के आने और पंद्रह से बीस हजार वाहनों के इस्तेमाल की संभावना है।

निष्कर्ष: सियासी संदेश और जनता की परीक्षा

एक नवंबर की रैली केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि विपक्ष के लिए अपनी एकजुटता दिखाने और सरकार पर दबाव बनाने का बड़ा मंच है। राहुल गांधी इसे जनता के गुस्से की अभिव्यक्ति बता रहे हैं, जबकि भाजपा इसे बिना सबूत का आरोप और संस्थाओं का अपमान बता रही है। व्यापारियों की चिंता और पुलिस की शर्तें इस आयोजन के व्यावहारिक पक्ष को भी सामने लाती हैं। आने वाले दो दिनों के कार्यक्रमों से साफ होगा कि विपक्ष अपने दावों के समर्थन में कितनी बड़ी उपस्थिति जुटा पाता है और सरकार तथा चुनाव आयोग की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष राष्ट्रपति को क्या सबूत सौंपता है और उन पर क्या कार्रवाई होती है।

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राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं, देश-राज्य की राजनीति और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबरों पर लेखन। बिजनेस और स्पोर्ट्स की खबरें भी। ब्रेकिंग न्यूज की होड़ के बीच डिजिटल मीडिया में एआई जैसे नवाचार की नर्सरी का छात्र।