Saturday, 31 October 2026

राहुल गांधी का आह्वान: एक नवंबर को चलो दिल्ली, एसआईआर और चुनाव आयोग पर सियासी टकराव तेज

राहुल गांधी के चलो दिल्ली मार्च की अपील के बाद दिल्ली में सियासी हलचल

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित वोट चोरी को लेकर चल रहा सियासी विवाद अब सड़क पर उतरने की तैयारी में है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लोगों से एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले इंडिया गठबंधन के चलो दिल्ली मार्च में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि यह मार्च लोकतंत्र को बचाने, कथित वोट चोरी को रोकने और संविधान की रक्षा के लिए है। उनकी अपील के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है।

राहुल गांधी ने 29 अक्टूबर को सोशल मीडिया मंच एक्स पर हिंदी में एक वीडियो संदेश जारी किया। उसमें उन्होंने कहा कि यह मार्च किसी एक राजनीतिक दल का नहीं है, बल्कि हिंदुस्तान की आत्मा का मार्च है। उन्होंने उन सभी लोगों को इसमें शामिल होने के लिए कहा, जो प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त से नाराज हैं और लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोग पुलिस और लाठीचार्ज की चिंता न करें और बिना डरे मार्च में आएं।

30 अक्टूबर को विपक्ष खरगे के आवास पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक जन महाभियोग की तैयारी में था, जो कोई संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है।

राहुल गांधी ने अपने संदेश में क्या कहा

राहुल गांधी ने अपने वीडियो संदेश में कहा, चलो दिल्ली रामलीला मार्च, लोकतंत्र को बचाने का, वोट चोरी को रोकने का और संविधान को बचाने का मार्च है। उन्होंने कहा कि जो भी लोग प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त से तंग हैं, जो भी लोकतंत्र बचाना चाहते हैं और संविधान की रक्षा करना चाहते हैं, वे सभी आएं। उनके शब्दों में, एक ही प्रोटेस्ट है, देश का प्रोटेस्ट है।

उन्होंने छात्र समूहों से भी जुड़ने की अपील की और कहा कि लोग पुलिस और लाठीचार्ज की चिंता न करें।

राहुल गांधी ने दावा किया कि त्रिलोकपुरी में एक जनसुनवाई में सिर्फ चार बूथों पर 416 वोट काटे गए। यह उनका दावा है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध खबरों में नहीं दी गई है।

विपक्ष की दो बड़ी मांगें क्या हैं

विपक्षी गठबंधन की इस मुहिम के केंद्र में दो मांगें हैं। पहली मांग यह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। दूसरी मांग यह है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा रहे हैं और इस प्रक्रिया में अनियमितताएं हो रही हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इसे वोट चोरी का मामला बता रहे हैं।

विपक्ष का कहना है कि नाम काटने का स्वतंत्र ऑडिट हो और प्रक्रिया पारदर्शी रहे। कुछ नेताओं ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई है।

भाजपा और जदयू का पलटवार

सत्तापक्ष ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है। भाजपा ने कहा है कि विपक्ष चुनावों में हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर लोगों के बीच भ्रम फैला रहा है। पटना में भाजपा के लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ अभियान के तहत आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कांग्रेस और राहुल गांधी की आलोचना की।

संजय जायसवाल ने बैलेट पेपर का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है। विधान परिषद के चुनाव में वरीयता आधारित मतदान प्रणाली के कारण बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है। इसके बावजूद, उनके दावे के अनुसार, 28 सीटों में कांग्रेस को केवल एक सीट मिली। उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी कांग्रेस चारों सीटें हार गई। भाजपा का तर्क है कि अगर बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी कांग्रेस हार रही है, तो ईवीएम पर सवाल उठाना सही नहीं है।

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 28 सीटों पर हुए चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दिल्ली चलने की बात कर रही है, जबकि जनता उसे पटना छोड़ो और कर्नाटक छोड़ो का संदेश दे रही है। जदयू ने पटना स्नातक सीट पर अपनी जीत को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कामकाज और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व का समर्थन बताया।

कांग्रेस ने वाराणसी और नागपुर का हवाला दिया

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बैलेट पेपर वाले तंज पर पलटवार भी किया है। प्रधानमंत्री ने 28 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर लिखा था कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों पर बैलेट पेपर से चुनाव हुए हैं। कांग्रेस नेताओं जयराम रमेश और सुप्रिया श्रीनेत ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वाराणसी की दोनों विधान परिषद सीटों पर भाजपा की हार और महाराष्ट्र के नागपुर में कांग्रेस की जीत का हवाला दिया।

कांग्रेस का कहना है कि वाराणसी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है और नागपुर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गढ़ माना जाता है। वहां भाजपा को झटका लगा है। सुप्रिया श्रीनेत ने भाजपा को चुनौती दी कि अगर उसे बैलेट पेपर पर इतना भरोसा है, तो लोकसभा और विधानसभा के सभी चुनाव भी इसी तरीके से कराए जाएं। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक क्षेत्रों की 11 सीटों में भाजपा ने छह और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें जीतीं। वाराणसी में शिक्षक और स्नातक, दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी ने भाजपा को हराया।

आगे क्या होगा

अब सबकी नजर 30 अक्टूबर की प्रतीकात्मक सुनवाई और एक नवंबर की रैली पर है। विपक्ष इसे देश का मुद्दा बता रहा है, सत्तापक्ष इसे हार के बाद की राजनीति कह रहा है। रैली में जुटने वाली भीड़ और चुनाव आयोग का रुख इस मुद्दे की दिशा तय करेंगे।

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राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं, देश-राज्य की राजनीति और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबरों पर लेखन। बिजनेस और स्पोर्ट्स की खबरें भी। ब्रेकिंग न्यूज की होड़ के बीच डिजिटल मीडिया में एआई जैसे नवाचार की नर्सरी का छात्र।