फैशन की खरीदारी का अंदाज पिछले एक दशक में पूरी तरह बदल चुका है। कभी हम मैगजीन के पन्ने पलटकर और वेबसाइटों पर ब्राउज़ करके ट्रेंड खोजा करते थे, फिर वीडियो और क्रिएटर्स का दौर आया। आज हालत यह है कि खरीदारी किसी खास प्रोडक्ट की तलाश से नहीं, बल्कि एक इंस्पिरेशन से शुरू होती है। इस फेस्टिव सीजन में यह बदलाव और भी साफ नजर आ रहा है। अमेजन फैशन इंडिया के निदेशक निखिल सिन्हा से बातचीत में सामने आए रुझान बताते हैं कि भारत में फैशन शॉपिंग की पूरी तस्वीर ही बदल गई है, और इसकी अगुवाई कर रही है Gen Z।
Gen Z की इंस्पिरेशन-फर्स्ट शॉपिंग
Gen Z उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों में सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि वे अब किसी खास प्रोडक्ट को सर्च करके खरीदारी शुरू नहीं करते। इसके बजाय वे सोशल मीडिया पर दिखे किसी ट्रेंड या किसी क्रिएटर के लुक से प्रेरित होकर शॉपिंग करते हैं। यानी पहले दिमाग में एक तस्वीर बनती है, एक स्टाइल का ख्याल आता है, और फिर उसी इंस्पिरेशन के हिसाब से प्रोडक्ट खोजा जाता है।
इस बदलाव में तकनीक भी बड़ी भूमिका निभा रही है। अमेजन का AI-पावर्ड शॉपिंग असिस्टेंट रूफस (Rufus) ग्राहकों को बातचीत और सिफारिशों के जरिए प्रोडक्ट खोजने में मदद कर रहा है। ग्राहक अब कीवर्ड टाइप करने के बजाय असिस्टेंट से संवाद करके अपनी पसंद के कपड़े और एक्सेसरीज तलाश रहे हैं। यह शॉपिंग के अनुभव को ज्यादा निजी और आसान बना रहा है।
ग्रेट इंडियन फेस्टिवल के रिकॉर्ड आंकड़े
इस साल के अमेजन ग्रेट इंडियन फेस्टिवल के आंकड़े इस बदलाव की गवाही देते हैं। इस फेस्टिवल में पिछले साल की तुलना में तीन गुना (3X) ग्रोथ दर्ज की गई, जिसमें फैशन और ब्यूटी कैटेगरी का बड़ा योगदान रहा। हैरान करने वाला आंकड़ा यह है कि फेस्टिवल के दौरान हर घंटे करीब 1,50,000 फैशन और ब्यूटी प्रोडक्ट बिके। यानी बिकने वाले हर तीन प्रोडक्ट में से एक फैशन या ब्यूटी कैटेगरी का था।
ये आंकड़े बताते हैं कि त्योहारी सीजन में भारतीय उपभोक्ताओं के लिए फैशन अब सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि जश्न का अहम हिस्सा बन चुका है। दिवाली, नवरात्रि और शादियों के सीजन में नए कपड़ों और एक्सेसरीज की खरीदारी परंपरा का रूप ले चुकी है, और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इस मांग को पूरा करने में सबसे आगे हैं।
नॉन-मेट्रो शहरों का दबदबा
इस फेस्टिव सीजन का सबसे दिलचस्प रुझान नॉन-मेट्रो बाजारों से आया है। पहली बार नॉन-मेट्रो शहरों से आने वाले ऑर्डर कुल ऑर्डर का आधे से ज्यादा, यानी 52 प्रतिशत रहे। यह इस बात का साफ संकेत है कि छोटे शहरों और कस्बों के उपभोक्ता अब ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए ब्रांड्स और लेटेस्ट ट्रेंड से जुड़ रहे हैं।
पहले माना जाता था कि फैशन के ताजा ट्रेंड सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित हैं, लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। छोटे शहरों के युवा भी सोशल मीडिया और क्रिएटर्स के जरिए उन्हीं ट्रेंड को फॉलो कर रहे हैं जो मेट्रो शहरों में चल रहे हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने भौगोलिक दूरियों को मिटा दिया है, और फैशन अब हर शहर की पहुंच में है।
इस सीजन में क्या ट्रेंड कर रहा है
फेस्टिव सीजन में एथनिक वियर की मांग हमेशा की तरह सबसे ऊपर रही। खासतौर पर महिलाओं के जयपुर के कॉटन एथनिक वियर को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। पारंपरिक कारीगरी और आरामदायक फैब्रिक का यह मेल त्योहारों के लिए परफेक्ट साबित हुआ।
पुरुषों के फैशन में रिलैक्स्ड सिल्हूट्स यानी ढीले-ढाले और आरामदायक कट्स का ट्रेंड बढ़ रहा है। टाइट-फिटिंग के बजाय अब कंफर्ट को प्राथमिकता दी जा रही है। फुटवियर कैटेगरी भी इस सीजन में छाई रही, हर सेकंड करीब चार जोड़ी जूते बिके। त्योहारों में नए जूते-चप्पल की खरीदारी भी परंपरा का हिस्सा है, और इस बार ऑनलाइन बिक्री ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।
प्रीमियम फैशन की ओर बढ़ता रुझान
एक और अहम बदलाव प्रीमियम फैशन की ओर बढ़ते झुकाव में दिख रहा है। उपभोक्ता अब ऐसे ब्रांड्स की तलाश कर रहे हैं जो उनकी निजी स्टाइल और लाइफस्टाइल को दर्शाते हों। केवल कीमत देखकर खरीदारी करने के बजाय अब ब्रांड की पहचान और स्टाइल स्टेटमेंट मायने रखने लगे हैं।
इसका असर आंकड़ों में भी दिख रहा है। कुल फैशन खर्च में प्रीमियम प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी पहले दस में से एक थी, जो अब बढ़कर पांच में से एक हो गई है। यानी हर पांच में से एक रुपया अब प्रीमियम फैशन पर खर्च हो रहा है। यह भारतीय मध्यम वर्ग की बढ़ती आकांक्षाओं और फैशन को लेकर बदली सोच को दर्शाता है।
आगे क्या दिख रहा है
ये सारे रुझान मिलकर एक ही कहानी कहते हैं, फैशन की खरीदारी अब सिर्फ सामान खरीदना नहीं रही। यह इंस्पिरेशन से शुरू होती है, AI असिस्टेंट की मदद से आसान होती है, छोटे शहरों तक पहुंचती है और निजी स्टाइल की अभिव्यक्ति बनती जा रही है। ब्रांड्स के लिए भी अब चुनौती यही है कि वे उपभोक्ताओं से उनके अंदाज में जुड़ें। आने वाले समय में सोशल मीडिया, क्रिएटर्स और AI का यह मेल फैशन शॉपिंग को और भी निजी और दिलचस्प बनाने वाला है।
