रवींद्र जडेजा का वनडे करियर खत्म? सेलेक्टर्स ने तैयार किया फ्यूचर प्लान

रवींद्र जडेजा का वनडे करियर खत्म? सेलेक्टर्स ने तैयार किया फ्यूचर प्लान

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट में बदलाव की बयार बह रही है. ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा, जिन्होंने सालों तक अपने बल्ले, गेंद और शानदार फील्डिंग से भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाईं, शायद अब वनडे क्रिकेट के मैदान पर दोबारा नीली जर्सी में नजर न आएं. मुख्य चयन समिति ने आगामी वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर लिया है. वे अब रवींद्र जडेजा की जगह अक्षर पटेल को टीम के मुख्य स्पिन-बॉलिंग ऑलराउंडर के रूप में आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.‘

द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 210 वनडे मैचों का शानदार अनुभव रखने वाले रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) का वनडे सफर अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है. इस बदलाव की सबसे बड़ी और तात्कालिक वजह अक्षर पटेल (Axar Patel) का लगातार निखरता प्रदर्शन है. बर्मिंघम में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए पहले वनडे मैच में अक्षर ने अपने ऑलराउंड खेल से महफिल लूट ली और उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया. इस मुकाबले में अक्षर ने गेंद और बल्ले दोनों से कमाल का खेल दिखाया.

उन्होंने पहले गेंदबाजी में अपनी फिरकी का जादू चलाते हुए 62 रन देकर 4 विकेट चटकाए, जो उनके वनडे करियर का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन है. इसके बाद जब टीम को रन चेज के दौरान समझदारी भरी पारी की जरूरत थी, तो उन्होंने बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए एक नाबाद अर्धशतक जड़ा और भारत को छह विकेट से एक आसान जीत दिला दी. इस प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं के इस भरोसे को और मजबूत कर दिया है कि अक्षर अब बड़ी जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हैं.

टीम संयोजन में बदलाव और कुलदीप यादव की बेबसी

भारतीय टीम प्रबंधन की रणनीतियों में भी हाल के दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. खासकर विदेशी पिचों पर, जैसे कि वर्तमान इंग्लैंड दौरे में, भारत बिना किसी विशेषज्ञ फ्रंटलाइन स्पिनर के मैदान पर उतर रहा है. इसका नतीजा यह है कि बेहतरीन फॉर्म में होने के बावजूद चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव को लगातार बेंच पर बैठकर वक्त बिताना पड़ रहा है.

टीम प्रबंधन कुलदीप को अंतिम एकादश में शामिल करने से कतरा रहा है क्योंकि वह निचले क्रम में बल्लेबाजी का कोई खास विकल्प नहीं देते हैं. स्पिन-बॉलिंग ऑलराउंडरों की कमी के बीच टीम को नंबर सात पर एक ऐसा खिलाड़ी चाहिए जो गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी में भी पूरा योगदान दे सके. यही वजह है कि कप्तान और कोच ने स्पिन विभाग का दारोमदार अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर की युवा ऑलराउंड जोड़ी के कंधों पर सौंप दिया है.

क्यों पीछे छूट गए ‘सर जडेजा’?

सवाल उठता है कि आखिर रवींद्र जडेजा इस रेस में पीछे क्यों छूट गए? रिपोर्ट के मुताबिक, चयनकर्ता अब जडेजा को वनडे प्रारूप में अपनी पहली पसंद के स्पिनर के रूप में देखने के पक्ष में नहीं हैं. बीसीसीआई के एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘सीमित ओवरों के क्रिकेट में जडेजा की गेंदबाजी काफी समय से उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है. उन्हें हाल ही में चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की टीम में सिर्फ इसलिए शामिल किया गया था क्योंकि भारतीय टीम को उम्मीद थी कि दुबई की पिचें स्पिनर्स के लिए मददगार साबित होंगी.’ इसके अलावा, सूत्र ने यह भी जोड़ा कि जडेजा की उस आक्रामक बल्लेबाजी पर भी अब असर पड़ा है जिसके लिए वह जाने जाते थे. साल 2019 के वनडे विश्व कप के दौरान जडेजा जिस तरह की पावर-हिटिंग और फिनिशिंग कर रहे थे, अब उनका वह स्तर नहीं रह गया है.

आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं. हाल में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई वनडे सीरीज में जडेजा का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था. उस तीन मैचों की सीरीज में, जिसे भारत 2-1 से हार गया था, जडेजा के बल्ले से केवल 43 रन ही निकल सके थे. इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत महज 14.33 का रहा और उनका स्ट्राइक रेट भी केवल 66.15 का था, जो आधुनिक वनडे क्रिकेट के मानकों से काफी कम है.

अक्षर पटेल के सामने भी हैं बड़ी चुनौतियां

हालांकि, अक्षर पटेल के लिए भी आगे की राह पूरी तरह आसान नहीं रहने वाली है.जहां एक तरफ उन्होंने स्पिन-अनुकूल पिचों पर बेहतरीन खेल दिखाया है, वहीं दक्षिण अफ्रीका जैसी तेज और उछाल भरी पिचों पर उनका प्रदर्शन अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है. दक्षिण अफ्रीका में मिले सीमित वनडे अवसरों में अक्षर खुद को साबित करने में संघर्ष करते दिखे हैं. वहां खेले गए तीन मैचों में वह बल्ले से केवल आठ रन ही बना पाए और गेंदबाजी में भी उन्हें महज एक सफलता हासिल हुई. ऐसे में आगामी विश्व कप में विदेशी और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अक्षर खुद को कैसे ढालते हैं, यह भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी.

भारतीय क्रिकेट का इतिहास गवाह है कि बदलाव हमेशा कड़े फैसलों के साथ आता है. रवींद्र जडेजा ने भारतीय क्रिकेट को जो दिया है, उसकी भरपाई करना आसान नहीं है. लेकिन भविष्य की जरूरतों और टीम संतुलन को देखते हुए, ऐसा लगता है कि भारतीय थिंक टैंक अब जडेजा के युग से आगे बढ़कर अक्षर पटेल के रूप में अपनी नई उम्मीदें तलाश रहा है.