Friday, 23 October 2026

पापांकुशा एकादशी 2026 आज: शुभ मुहूर्त, व्रत पारण का समय और पूजा विधि जानें

पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का महत्व

पापांकुशा एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और फलदायी मानी जाती है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित है और इसका पालन करने से ज्ञात-अज्ञात पापों से मुक्ति मिलती है तथा घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है। इस वर्ष पापांकुशा एकादशी का व्रत आज यानी गुरुवार 22 अक्टूबर 2026 को रखा जा रहा है।

पापांकुशा एकादशी 2026: तिथि और व्रत का दिन

एकादशी तिथि 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:11 बजे शुरू हुई और 22 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:47 बजे समाप्त हुई। चूंकि तिथि दो दिनों में फैली थी, इसलिए उदया तिथि के नियम के अनुसार व्रत का दिन 22 अक्टूबर गुरुवार को निश्चित हुआ है। यानी आज देशभर में श्रद्धालु पापांकुशा एकादशी का व्रत रख रहे हैं और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

उदया तिथि का नियम हिंदू पंचांग में व्रत-त्योहारों के निर्धारण का प्रमुख आधार है। इसके अनुसार जिस दिन सूर्योदय के समय तिथि विद्यमान होती है, वही तिथि उस दिन के लिए मानी जाती है। चूंकि 22 अक्टूबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि थी, इसलिए व्रत आज ही रखा जा रहा है।

शुभ मुहूर्त: कब करें पूजा

शास्त्रों के अनुसार शुभ मुहूर्त में की गई पूजा से फल कई गुना बढ़ जाता है। आज के दिन ये समय पूजा के लिए विशेष माने गए हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:45 से 5:35 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:28 बजे तक — पूजा का सर्वोत्तम समय

जो भक्त सुबह स्नान के बाद ही पूजा करना चाहते हैं, वे ब्रह्म मुहूर्त या उसके आसपास पूजन कर सकते हैं। ब्रह्म मुहूर्त को दिन का सबसे पवित्र समय माना जाता है और इस समय की गई उपासना से मन एकाग्र होता है। यदि दिन में पूजा करनी हो तो अभिजीत मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि इस काल में किए गए धार्मिक कार्य विशेष फल देते हैं। आज का अभिजीत मुहूर्त करीब 45 मिनट का है, इसलिए भक्तों के पास पूजा का पर्याप्त समय रहेगा।

व्रत का महत्व: पापों से मुक्ति और शांति

पापांकुशा एकादशी का नाम ही इसके महत्व को दर्शाता है — यह एकादशी पापों पर अंकुश लगाने वाली मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

  • इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से ज्ञात और अज्ञात, दोनों तरह के पापों से मुक्ति मिलती है।
  • घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
  • इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है।
  • व्रत के साथ-साथ जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और आवश्यक वस्तुओं का दान करना पुण्यकारी माना जाता है।

इस एकादशी का व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन संयम और भक्ति भाव से भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं। मान्यता है कि पापांकुशा एकादशी का व्रत कठिन से कठिन पापों को भी नष्ट कर देता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। इसीलिए वर्ष की एकादशियों में इसका विशेष स्थान है।

पूजा विधि: ऐसे करें भगवान विष्णु का पूजन

पापांकुशा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा इस विधि से की जानी चाहिए:

  1. प्रातः स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मन में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  2. पूजा स्थान तैयार करें: पूजा चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएं और भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  3. सामग्री अर्पित करें: भगवान को पीले फूल, पीला वस्त्र, चंदन, अक्षत, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित करें। विष्णु पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है, इसलिए तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।
  4. मंत्र जाप: विष्णु मंत्रों का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। पाठ के दौरान शुद्धता और एकाग्रता बनाए रखें।
  5. आरती: अंत में घी के दीये से भगवान विष्णु की आरती उतारें और प्रसाद वितरण करें।

पूजा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

  • पूजा पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करें।
  • व्रत के दिन सात्विक आहार का पालन करें और बुरे विचारों से दूर रहें।
  • क्रोध, छल-कपट और झूठ से परहेज करें।
  • संभव हो तो दिन में भगवान के नाम का स्मरण और भजन-कीर्तन करें।

दान का महत्व

पापांकुशा एकादशी पर दान का विशेष पुण्य माना गया है। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दैनिक आवश्यक वस्तुओं का दान करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। दान देते समय अहंकार का भाव न रखें और सच्चे मन से सेवा भाव रखें — यही शास्त्रों का सार है। अन्नदान को महादान माना गया है, इसलिए इस दिन भूखे को भोजन कराना अत्यंत शुभ फल देता है।

व्रत पारण: 23 अक्टूबर का शुभ समय

एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण करके खोला जाता है। इस वर्ष पारण का समय:

  • दिनांक: 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
  • समय: सुबह 6:27 से 8:42 बजे तक

व्रत रखने वाले भक्तों को इसी समयावधि में पारण करना चाहिए। पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा करके नैवेद्य का भोग लगाना शुभ माना जाता है। पारण के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करें और दिन की शुरुआत शुभ कार्यों से करें।

निष्कर्ष

पापांकुशा एकादशी भगवान विष्णु की कृपा पाने और पापों से मुक्ति का एक दुर्लभ अवसर है। आज 22 अक्टूबर को व्रत रखकर श्रद्धापूर्वक पूजन करें, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और जरूरतमंदों की सेवा व दान करें। शास्त्रीय विधि से व्रत का पालन करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। जो भक्त इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, उन पर निश्चित ही विष्णु की कृपा बरसती है।

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राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं, देश-राज्य की राजनीति और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबरों पर लेखन। बिजनेस और स्पोर्ट्स की खबरें भी। ब्रेकिंग न्यूज की होड़ के बीच डिजिटल मीडिया में एआई जैसे नवाचार की नर्सरी का छात्र।