Sunday, 1 November 2026

मनीषा भानवाला ने रचा इतिहास, विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद मनीषा भानवाला

भारतीय कुश्ती के इतिहास में 30 अक्टूबर 2026 का दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। हरियाणा की पहलवान मनीषा भानवाला ने सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। वह विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं। कजाकिस्तान के अस्ताना में खेले गए महिलाओं के 59 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में मनीषा ने अमेरिका की एबिगेल नेटे को 8-6 से हराया।

मनीषा की यह जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि फाइनल में वह एक समय 0-6 से पिछड़ रही थीं। ऐसा लग रहा था कि मुकाबला उनके हाथ से निकल जाएगा। लेकिन मनीषा ने हार नहीं मानी और शानदार वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। भारत को 15 साल बाद विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक मिला है। मनीषा अब विश्व खिताब जीतने वाली दूसरी भारतीय पहलवान हैं।

0-6 से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी

फाइनल मुकाबले की शुरुआत मनीषा के लिए कठिन रही। अमेरिका की एबिगेल नेटे ने आक्रामक शुरुआत की और मनीषा को गिराकर चार अंक हासिल कर लिए। मनीषा ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन रिव्यू उनके खिलाफ गया। इससे नेटे को एक और अंक मिला और उनकी बढ़त 5-0 हो गई। इसके बाद मनीषा को चेतावनी भी मिली, जिससे नेटे 6-0 से आगे हो गईं। पहले हाफ में मनीषा ने पुश आउट के जरिए एक अंक लिया, जिससे स्कोर 6-1 हो गया।

दूसरे हाफ में मनीषा ने पूरी ताकत से वापसी की। उन्होंने पहले टेकडाउन से अंक हासिल किए और फिर गट-रेंच के जरिए दो अंक और जोड़ लिए। एक समय स्कोर 6-6 पर पहुंच गया, लेकिन मनीषा ने दबाव में धैर्य नहीं खोया। उन्होंने एक और टेकडाउन से 8-6 की बढ़त बना ली और फिर इस बढ़त को अंत तक बचाए रखा। कोच ने मनीषा से सब्र रखने को कहा था और मनीषा ने कहा था कि वह सोने के बिना वापस नहीं आएंगी।

फाइनल तक का सफर और भारत के चार पदक

मनीषा ने इस चैंपियनशिप में शानदार सफर तय किया। उन्होंने कनाडा की लॉरेंस ब्यूरिगार्ड को हराकर अपना अभियान शुरू किया। इसके बाद उन्होंने मंगोलिया की बोलोरटुया खुरेलखु को हराया और सेमीफाइनल में कजाकिस्तान की एल्टिन शागायेवा को मात देकर फाइनल में जगह बनाई।

इस चैंपियनशिप में भारत की महिला टीम का प्रदर्शन भी ऐतिहासिक रहा। मनीषा के गोल्ड के अलावा नीलम सिरोही ने 50 किलोग्राम और काजल धोचक ने 76 किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक जीता। तनु शर्मा ने 72 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक हासिल किया। इस तरह भारत ने कुल चार पदक जीते। यह भारत का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन बताया जा रहा है। इससे पहले 2011 में भारत को दो पदक मिले थे।

सुशील कुमार और अंशु मलिक के बाद नई उपलब्धि

मनीषा की जीत को भारतीय कुश्ती के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। सुशील कुमार ने 2010 में विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर भारतीय कुश्ती को नई पहचान दी थी। उसके बाद महिला कुश्ती में अंशु मलिक ने 2021 में 57 किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक जीतकर भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। लेकिन गोल्ड का इंतजार बना हुआ था। मनीषा ने इस इंतजार को खत्म कर दिया है।

मनीषा 29 साल की हैं और हरियाणा के रोहतक से आती हैं। वह सर छोटू राम अखाड़े से जुड़ी हैं। कोच मनदीप सिंह के अनुसार, मनीषा हमेशा से आक्रामक कुश्ती लड़ती हैं और अब उनका अगला सपना ओलंपिक पदक जीतना है।

पिता को खोने के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत

मनीषा की यह सफलता मुश्किलों के बीच आई है। साल 2022 में जब वह एशियाई चैंपियनशिप के लिए मंगोलिया गई थीं, तब उनके पिता सुरेश का घर पर निधन हो गया था। भारतीय कुश्ती महासंघ ने मनीषा से कहा था कि वह चाहें तो घर लौट सकती हैं। लेकिन मनीषा ने ऐसा नहीं किया और उस इवेंट में 65 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक जीता। मनीषा कुश्ती में अपने पिता की वजह से ही आई थीं। पिता को खोने के बाद भी कुश्ती के प्रति प्रेम ने उन्हें खेल से जोड़े रखा।

मनीषा ने 2013 में फिटनेस में सुधार के लिए ट्रेनिंग शुरू की थी। पहले उन्होंने जींद में ट्रेनिंग की, फिर रोहतक चली गईं। उन्होंने 2023 और 2024 में भी एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य और 2025 में गोल्ड जीता था। वह 2023 से विश्व चैंपियनशिप में भाग ले रही थीं, लेकिन इससे पहले उन्हें पदक नहीं मिला था।

भारतीय महिला कुश्ती के लिए नई उम्मीद

मनीषा की जीत भारतीय महिला कुश्ती के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। चार पदकों के साथ टीम का प्रदर्शन बताता है कि भारत में महिला कुश्ती की गहराई बढ़ रही है।

आने वाले समय में मनीषा के सामने ओलंपिक की चुनौती होगी। विश्व चैंपियन बनने के बाद उनसे उम्मीदें और बढ़ जाएंगी, और देशभर में उनकी जीत का जश्न मनाया जा रहा है। हरियाणा में उनके गांव और अखाड़े में भी खुशी का माहौल है। मनीषा ने फाइनल में जिस धैर्य और साहस का प्रदर्शन किया है, वह बताता है कि वह बड़े दबाव में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं।

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