Sunday, 8 November 2026

दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला: फिल्म ‘दूसरा’ ने सौरव गांगुली के व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन किया, मेकर्स को 2 करोड़ जमा करने का आदेश

सौरव गांगुली और फिल्म दूसरा का एक दृश्य

दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म दूसरा को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि इस फिल्म ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने फिल्म के मेकर्स को दो करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया है। साथ ही फिल्म की शुरुआत और अंत में हिंदी और अंग्रेजी में डिस्क्लेमर लगाने का भी आदेश दिया गया है। कोर्ट ने फिल्म को ओटीटी या किसी अन्य माध्यम पर रिलीज करने पर भी रोक लगा दी है। यह फैसला किसी मशहूर हस्ती की पहचान के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर एक अहम मिसाल बन गया है।

यह मामला सौरव गांगुली और लव फिल्म्स की ओर से दायर किए गए मुकदमे से जुड़ा है। मुकदमे में कहा गया था कि फिल्म दूसरा में गांगुली की पहचान और उनके जीवन की घटनाओं का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस दलील को सही माना और फिल्म के मेकर्स रमेश देव प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ आदेश जारी किए। यह फैसला 7 नवंबर को आया है।

कोर्ट ने क्या कहा: गांगुली की पहचान से जुड़ी है फिल्म की कहानी

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि गांगुली के व्यक्तित्व के तत्व और उनके जीवन की घटनाएं फिल्म की कहानी से गहरे तौर पर जुड़ी हुई हैं। कोर्ट का मानना था कि फिल्म से उन हिस्सों को हटाना मुश्किल है, जो गांगुली की पहचान से जुड़े हैं। यही वजह है कि कोर्ट ने फिल्म को पूरी तरह रोकने के बजाय डिस्क्लेमर लगाने का रास्ता अपनाया है।

कोर्ट ने आदेश दिया है कि फिल्म की शुरुआत और अंत में साफ तौर पर यह लिखा जाए कि गांगुली ने अपनी पहचान के व्यावसायिक इस्तेमाल या फिल्म में अपने चित्रण की अनुमति नहीं दी है। डिस्क्लेमर में यह भी साफ किया जाना चाहिए कि फिल्म का गांगुली से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है और न ही इसे उनकी ओर से कोई मंजूरी मिली है। यह डिस्क्लेमर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दिखाया जाएगा।

इसके साथ ही कोर्ट ने फिल्म के मेकर्स को दो करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया है। यह रकम मुकदमे की कार्यवाही के दौरान जमा की जाएगी। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि जब तक मामला पूरी तरह सुलझ नहीं जाता, तब तक फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म या किसी अन्य माध्यम पर रिलीज नहीं किया जा सकता।

व्यक्तित्व अधिकार क्या होते हैं

इस फैसले के बाद व्यक्तित्व अधिकारों को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। व्यक्तित्व अधिकारों का मतलब है कि कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान से जुड़ी चीजों जैसे अपना नाम, अपनी तस्वीर, अपनी आवाज और अपनी छवि पर अधिकार रखता है। कोई दूसरा व्यक्ति या कंपनी बिना अनुमति के इनका व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकती।

गांगुली के मामले में कोर्ट ने यही सिद्धांत लागू किया है। कोर्ट का कहना है कि गांगुली की पहचान और उनके जीवन की घटनाएं उनकी अपनी संपत्ति हैं। फिल्म में उनका इस्तेमाल करके मेकर्स ने उनकी पहचान से फायदा उठाने की कोशिश की, जो गलत है।

फिल्म दूसरा को लेकर क्या है विवाद

फिल्म दूसरा को लेकर विवाद काफी समय से चल रहा है। गांगुली और लव फिल्म्स का आरोप है कि फिल्म में गांगुली की पहचान और उनके जीवन की घटनाओं का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया है। फिल्म की कहानी में ऐसे तत्व हैं, जो सीधे तौर पर गांगुली के जीवन से जुड़े दिखते हैं। मेकर्स की ओर से यह दलील दी गई थी कि फिल्म एक काल्पनिक कहानी है, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना।

कोर्ट ने कहा कि फिल्म की कहानी गांगुली की पहचान से इतनी गहरे तौर पर जुड़ी है कि दर्शक इसे गांगुली की कहानी के तौर पर ही देखेंगे। ऐसे में फिल्म पर डिस्क्लेमर लगाना जरूरी है, ताकि दर्शकों को यह साफ पता चल सके कि यह गांगुली की आधिकारिक कहानी नहीं है और न ही इसे उनकी मंजूरी मिली है।

फिल्म के मेकर्स के लिए यह फैसला एक बड़ा झटका है। दो करोड़ रुपये जमा करने के साथ-साथ फिल्म की रिलीज पर रोक ने उनकी योजनाओं पर असर डाला है। फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना थी, लेकिन अब ओटीटी रिलीज पर रोक लगने से मेकर्स को भारी नुकसान हो सकता है।

गांगुली की आधिकारिक बायोपिक भी बन रही है

इस बीच सौरव गांगुली की आधिकारिक जीवन पर आधारित फिल्म भी बन रही है। इस फिल्म का नाम दादा: द सौरव गांगुली स्टोरी है। इस फिल्म का निर्देशन विक्रमादित्य मोटवाने कर रहे हैं, जबकि इसका निर्माण लव रंजन और अंकुर गर्ग कर रहे हैं। यह फिल्म गांगुली के जीवन की आधिकारिक कहानी होगी, जिसे उनकी अनुमति से बनाया जा रहा है।

गांगुली की बायोपिक को लेकर प्रशंसकों में काफी उत्साह है। गांगुली भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में से एक रहे हैं। उनके नेतृत्व में भारतीय टीम ने विदेशों में जीतना सीखा था। उनके जीवन में कई ऐसे पल आए हैं, जो फिल्म के लिए एक अच्छी कहानी बन सकते हैं।

दूसरा फिल्म को लेकर आया फैसला इस बायोपिक के लिए भी अहम है। कोर्ट के फैसले से यह साफ हो गया है कि गांगुली की कहानी पर सिर्फ उनकी अनुमति से ही फिल्म बनाई जा सकती है। बिना अनुमति उनकी पहचान का इस्तेमाल करने पर अदालत सख्त कार्रवाई कर सकती है।

फिल्मी दुनिया के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला

यह फैसला फिल्मी दुनिया के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अक्सर फिल्मों में मशहूर हस्तियों के जीवन की घटनाओं को बिना अनुमति इस्तेमाल किया जाता है। कई बार फिल्मों में असली लोगों से मिलते-जुलते किरदार दिखाए जाते हैं। कोर्ट के इस फैसले से मेकर्स को यह समझना होगा कि किसी की पहचान का इस्तेमाल करने से पहले उसकी अनुमति लेना जरूरी है।

कुल मिलाकर दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला सौरव गांगुली के लिए एक बड़ी जीत है। इससे न सिर्फ उनकी पहचान की रक्षा हुई है, बल्कि यह भी साफ हो गया है कि मशहूर हस्तियों की पहचान का बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

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राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं, देश-राज्य की राजनीति और सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबरों पर लेखन। बिजनेस और स्पोर्ट्स की खबरें भी। ब्रेकिंग न्यूज की होड़ के बीच डिजिटल मीडिया में एआई जैसे नवाचार की नर्सरी का छात्र।