मुंबई में विमल इलायची के प्रचार से जुड़े मामले में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई जारी रहेगी। विभाग का कहना है कि अजय देवगन की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर किए जाने के बावजूद अधिनिर्णय की प्रक्रिया कानून के अनुसार आगे बढ़ेगी। इस बयान के बाद यह विवाद फिर चर्चा में आ गया है।
यह मामला अब केवल एक विज्ञापन तक सीमित नहीं है। इसमें मशहूर हस्तियों की जिम्मेदारी, परोक्ष विज्ञापन और एक ही ब्रांड पहचान के अलग उत्पादों के बीच की रेखा जैसे सवाल शामिल हो गए हैं। चार नवंबर की सुनवाई से इन सवालों पर कुछ स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
एफडीए आयुक्त ने कार्रवाई जारी रहने की बात कही
रिपोर्टों के अनुसार, दो नवंबर को एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने एएनआई से बातचीत में विभाग का रुख स्पष्ट किया। उनके अनुसार, अधिनिर्णय की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और वह कानून के दायरे में आगे बढ़ेगी। विभाग अपने स्तर पर तय प्रक्रिया का पालन करेगा।
एफडीए का आरोप है कि सहायक आयुक्त की जांच और सुनवाई पूरी हो चुकी है और मामला अधिनिर्णय के लिए संयुक्त आयुक्त को भेजा गया है।
विभाग का कहना है कि प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक अदालत विभाग को रोकने वाला कोई आदेश नहीं देती। याचिका लंबित होने का अपने आप यह अर्थ नहीं है कि कार्यवाही रुक गई है। अंतिम स्थिति अदालत के आदेश और अधिनिर्णय के परिणाम पर निर्भर करेगी।
अगस्त में भेजे गए नोटिस और नियामक की चिंता
रिपोर्टों के अनुसार, मामला अगस्त में सामने आया, जब एफडीए ने अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस भेजे। बताया गया है कि ये नोटिस ग्यारह अगस्त की तारीख के थे और इनका संबंध विमल इलायची के प्रचार अभियानों से था। विमल इलायची को स्वाद वाली इलायची और माउथ फ्रेशनर के रूप में पेश किया जाता है।
नियामक की चिंता ब्रांड पहचान को लेकर बताई जा रही है। एफडीए का आरोप है कि एक ही ब्रांड पहचान के तहत स्वाद वाली इलायची का विज्ञापन विमल पान मसाला और गुटखा के परोक्ष या अप्रत्यक्ष प्रचार का काम कर सकता है। विभाग के अनुसार, इससे प्रतिबंधित उत्पादों की ओर ध्यान खींचा जा सकता है, भले ही विज्ञापन में उन उत्पादों का नाम सीधे न लिया गया हो।
रिपोर्टों के अनुसार, महाराष्ट्र में ऐसे उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर तेरह जुलाई के खाद्य सुरक्षा आदेश से एक साल की रोक लगी थी। यह आदेश अधिनियम की धारा 30(2)(ए) के तहत जारी बताया गया है। नोटिस धारा 24 और 53 के तहत जारी बताए गए हैं, और 2018 के विज्ञापन नियमों का भी हवाला दिया गया था।
तीनों कलाकारों को नोटिस कैसे पहुंचे और क्या मांगा गया
रिपोर्टों के अनुसार, नोटिस पहुंचाने का तरीका हर कलाकार के मामले में अलग रहा। देवगन को जुहू स्थित उनके आवास पर, शाहरुख खान को बांद्रा स्थित उनके आवास मन्नत पर और टाइगर श्रॉफ को उनकी प्रोडक्शन कंपनी टाइगर श्रॉफ प्रोडक्शंस एलएलपी के माध्यम से नोटिस दिया गया बताया गया है।
नोटिस में कलाकारों से अपनी भूमिका स्पष्ट करने को कहा गया बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, उनसे अभियान रोकने, अपने मंचों से सामग्री हटाने और समझौते, दस्तावेज, मंचों व प्रसारण अवधि की जानकारी देने को कहा गया था। एफडीए का कहना है कि तीनों के खिलाफ शुरुआती कार्यवाही पूरी होकर अधिनिर्णय के लिए भेजी जा चुकी है।
अजय देवगन की याचिका में क्या दलीलें दी गई हैं
याचिका में कहा गया है कि देवगन ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एफडीए के नोटिस को चुनौती दी है और विभाग की कार्रवाई को मनमाना बताया है। उनकी ओर से तर्क दिया गया बताया गया है कि उन्होंने केवल विमल इलायची का समर्थन किया था, न कि विमल पान मसाला का। याचिका के अनुसार, दोनों उत्पादों को एक जैसा मानकर कार्रवाई करना सही नहीं है।
याचिका में यह दलील भी दी गई बताई गई है कि प्रवर्तन की जिम्मेदारी निर्माण करने वाली कंपनी पर होनी चाहिए, न कि अभिनेता या ब्रांड एंबेसडर पर। याचिका में कहा गया है कि उनका अनुबंध केवल इलायची उत्पादों तक सीमित था और अभियान में उनकी भागीदारी अब समाप्त हो चुकी है।
याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि नोटिस पहले से तय निष्कर्ष जैसा लगता है। याचिका में कहा गया है कि इससे संविधान के अनुच्छेद 14 और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि प्राधिकरण ने नोटिस का आधार बनी सटीक प्रसारण रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं कराई। ये याचिका के तर्क हैं, अदालत के निष्कर्ष नहीं।
चार नवंबर की सुनवाई और आगे की राह
रिपोर्टों के अनुसार, मामला चार नवंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। बताया गया है कि सुनवाई मुख्य न्यायाधीश महेश सी. त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ के सामने होनी है। इस सुनवाई में याचिका के सवालों पर विचार हो सकता है और विभाग का पक्ष भी सुना जा सकता है।
निर्माता कंपनी से जुड़ा पहलू भी सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, विमल की निर्माता कंपनी पीबी एग्रो ने दिल्ली हाईकोर्ट में एफडीए के नोटिस को रद्द करने की मांग की थी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र के आधार पर अनुरोध स्वीकार नहीं किया।
व्यापक संदर्भ में यह मामला कलाकारों के समर्थन की जिम्मेदारी पर बहस सामने लाता है। सवाल है कि कलाकार की जिम्मेदारी कहां तक मानी जाए और एक ही ब्रांड नाम से अलग उत्पादों का विज्ञापन कब परोक्ष प्रचार बन सकता है।
फिलहाल एफडीए का कहना है कि उसकी प्रक्रिया कानून के अनुसार जारी रहेगी, जब तक अदालत कोई अलग निर्देश नहीं देती। चार नवंबर की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि अदालत कोई अंतरिम निर्देश देती है या कार्यवाही अपने तय रास्ते पर आगे बढ़ती है। तब तक इस विवाद में कोई अंतिम नतीजा सामने नहीं आया है।
