अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई पुलिस ने बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। पुलिस ने इस मामले के सभी 11 आरोपियों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम यानी मकोका की धाराएं जोड़ दी हैं। बुधवार, 28 अक्टूबर को सभी आरोपियों को विशेष मकोका अदालत के सामने पेश किया गया, जहां अदालत ने उनकी दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति दे दी। इस कार्रवाई के बाद मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया एक नए चरण में पहुंच गई है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई सबूतों के आधार पर की जाएगी।
18 अक्टूबर की रात क्या हुआ था
यह मामला 18 अक्टूबर की शाम से जुड़ा है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, शाम करीब सात बजे टाइगर श्रॉफ मुंबई के जुहू इलाके में एक फुटबॉल क्लब से निकल रहे थे। उसी दौरान उनकी कार पर गोलीबारी हुई। इस घटना में अभिनेता को कोई चोट नहीं आई, लेकिन उनके ड्राइवर को चोट लगी थी। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करके आरोपियों को पकड़ा। शुरुआती जांच में यह मामला हत्या के प्रयास और हथियारों से जुड़े कानूनों के तहत दर्ज किया गया था। बाद में जांच का दायरा बढ़ता गया और पुलिस ने संगठित अपराध के पहलू पर भी ध्यान देना शुरू किया।
एफआईआर से मकोका तक का सफर
पुलिस के अनुसार, यह मामला 19 अक्टूबर को अपराध शाखा के आपराधिक जांच विभाग में दर्ज किया गया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1) और धारा 3(5) के साथ-साथ शस्त्र अधिनियम की धारा 3 और 25 लगाई गई थीं। धारा 109(1) हत्या के प्रयास से जुड़ी मानी जाती है, जबकि धारा 3(5) साझा मंशा से किए गए अपराध से जुड़ी है। इसके बाद 27 अक्टूबर को मकोका की धाराएं जोड़ने की अनुमति सक्षम अधिकारी से मिली। पुलिस ने बताया कि इस अनुमति के बाद मकोका की धारा 3(1)(ii), धारा 3(2) और धारा 3(4) को मामले में जोड़ा गया है।
मकोका एक सख्त कानून माना जाता है, जिसका इस्तेमाल संगठित अपराध के मामलों में किया जाता है। इस कानून के तहत पुलिस को जांच के लिए अधिक समय और कड़े प्रावधान मिलते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस कानून के तहत आरोपपत्र दाखिल करने की समय सीमा 180 दिन तक हो सकती है और जमानत मिलना भी अपेक्षाकृत कठिन होता है। हालांकि किसी आरोपी पर धाराएं लगना ही दोष सिद्ध होना नहीं होता। अदालत में सबूतों की जांच के बाद ही अंतिम फैसला होगा। इसीलिए इस मामले में लगाए गए आरोपों को अभी पुलिस के दावे और जांच के दायरे में ही देखा जाना चाहिए।
अदालत में बुधवार को क्या हुआ
बुधवार को सभी 11 आरोपियों को विशेष मकोका अदालत के सामने पेश किया गया। अदालत ने उनकी दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति दे दी, ताकि मकोका की नई धाराओं के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके। इससे पहले सोमवार को एस्प्लेनेड अदालत ने चार आरोपियों को 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा था। ये चार आरोपी कुणाल, सुमित, राधा और बबीता बताए गए हैं। ये दूसरी बार अदालत के सामने पेश हुए थे। बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में कहा था कि इन चारों से पहले ही लंबी पूछताछ हो चुकी है और उनके मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंक कार्ड जैसी चीजें बरामद कर ली गई हैं। वकील का कहना था कि आवाज के नमूने लेने जैसे काम के लिए ही हिरासत बढ़ाने की बात कही गई थी।
पुलिस के दावे और जांच की दिशा
कुछ रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से कहा गया है कि इस गोलीबारी के पीछे वसूली और दबदबा बनाने का मकसद हो सकता है। पुलिस का यह भी दावा है कि जांच में आरोपियों के एक संगठित गिरोह से कथित संबंधों की बात सामने आई है। एक मुख्य आरोपी के तौर पर अनिल पंडित का नाम भी रिपोर्टों में आया है, जिसके बारे में कहा गया है कि वह फरार है और उसने सोशल मीडिया के जरिए हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। पुलिस उसे एक गिरोह का कथित सदस्य बता रही है। यह सभी बातें अभी जांच और पुलिस के दावों के दायरे में हैं। अदालत में इन दावों की पुष्टि सबूतों के आधार पर ही होगी।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों को हरियाणा के सोनीपत, दिल्ली, कोटा और इंदौर जैसे स्थानों से पकड़ने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है। इससे पता चलता है कि जांच का दायरा केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहा। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि हथियार कहां से आए, आरोपियों को रहने और आने-जाने में किसने मदद की और पैसों का लेन-देन किस तरह हुआ। इन सभी पहलुओं की जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी सबूतों की भूमिका अहम मानी जाती है। पुलिस ने यह भी कहा है कि जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
आगे क्या होगा और क्यों है यह मामला अहम
मकोका की धाराएं जुड़ने के बाद इस मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया लंबी चल सकती है। पुलिस को अब आरोपपत्र तैयार करने के लिए अधिक समय मिलेगा, लेकिन साथ ही उसे मजबूत सबूत भी पेश करने होंगे। अदालत में बचाव पक्ष भी आरोपियों के अधिकारों की बात रखेगा। इस तरह की कार्यवाही में हर कदम अदालत की निगरानी में उठाया जाता है। दर्शकों और फिल्म प्रेमियों के लिए सबसे अहम बात यह है कि टाइगर श्रॉफ इस घटना में सुरक्षित रहे। उनके ड्राइवर को लगी चोट के बाद इलाज और देखभाल की जानकारी भी जांच से जुड़ी रिपोर्टों में सामने आई थी।
